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Bijnor News: रक्षाबंधन पर 27 हजार बहनों ने किया बसों में फ्री सफर

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- 84 यात्रियों ने दो दिन में सफर किया रोडवेज बसों में
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- 45 हजार यात्रियों ने बृहस्पतिवार को रोडवेज बसों में की यात्रा
- 39 हजार यात्रियों ने बुधवार को रोडवेज बसों में किया था सफर

संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सरकार की ओर से रोडवेज बसों में रक्षाबंधन के पर्व पर बहनों को निशुल्क यात्रा कराई गई। बुधवार और बृहस्पतिवार को 27 हजार से अधिक बहनों ने बिजनौर डिपो की बसों में सफर किया है। इन दो दिनों में कुल 84 हजार लोगों ने रोडवेज बसों की यात्रा की। भीड़ ज्यादा होने के कारण परेशानियों का भी सामना करना पड़ा।

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बृहस्पतिवार को करीब 45 हजार यात्रियों ने बिजनौर डिपो की बसों में सफर किया। इनमें से करीब 17 हजार महिलाएं शामिल रहीं, जिन्हें बस में निशुल्क यात्रा कराई गई। इसके अलावा बुधवार को 39009 यात्रियों ने सफर किया था, जिनमें से 10315 महिला यात्री थी। इस तरह दो दिनों में 27 हजार से ज्यादा महिलाओं ने रोडवेज बसों में फ्री सफर किया। बसों में भीड़ अधिक होने से परिवहन विभाग की चांदी हो गई। रक्षाबंधन के पर्व पर रोजाना से ज्यादा आमदनी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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वहीं, दूसरी ओर बसों में यात्रियों की काफी भीड़ रही। बिजनौर डिपो से अलग-अलग रूटों पर 105 बसों का संचालन किया गया। इनमें 42 अनुबंधित और 63 निगम की बस शामिल रहीं। बसों में भीड़ अधिक होने से लोगों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। घंटों इंतजार के बाद यात्रियों को बस मिली। इसके बाद यात्री अपनी मंजिल तक पहुंचे।

रक्षाबंधन पर डिपो की आय अच्छी रही। उम्मीद से ज्यादा यात्रियों ने बसों में सफर किया। सभी रूटों पर बसों को भेजा गया। 27 हजार से ज्यादा बहनों ने बिजनौर डिपो की बसों में सफर किया है। किसी भी यात्रियों को बिना परेशानी के उनकी मंजिल तक पहुंचाने की पूरी कोशिश की जा रही है। - धीरज सिंह पंवार, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, बिजनौर
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रोडवेज बसों में सीट के लिए मची आपाधापी

धामपुर में रोडवेज डिपो और नगीना चौराह पर यात्रियों की भारी भीड़ रही। जैतरा में पुलिस चौकी के पास जाम लगा रहा है। जैतरा रेलवे फाटक से पंजाबी बाजार तक जाम में फंसे लोगों का निकलना मुश्किल हो गया। कविता रानी, राखी देवी, मालती, बबीता, यशोदा आदि का कहना था कि बसों की संख्या भी बढ़ानी चाहिए थी। नूरपुर, धामपुर, चांदपुर में अनुबंध पर लगी अधिकांश बसों के पहिए नहीं चले। इसके कारण बहनों को आवाजाही में दिक्कत आई।
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