बिजनौर। डेंगू पर वार के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। डेंगू के लार्वा को जड़ खत्म करने के लिए जिले में 14 टीमों का गठन किया गया है। 12 नगर पालिका एवं छह नगर पंचायतों के 328 वार्डों में लार्वा साइट पर छिड़काव शुरू करा दिया गया है। साथ ही बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में यह कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी ब्रजभूषण ने बताया कि आमतौर मलेरिया, डेंगू और वायरल फीवर के लक्षण अन्य बुखार की तरह से ही होते हैं, लेकिन इसे नजरअंदाज करने पर इसकी अवस्था गंभीर हो सकती है। इसलिए इसके प्रति सावधानी बरतना बेहद ही आवश्यक है। बड़ों की अपेक्षा बच्चों में यह तेजी से फैलता है। कहना है कि बारिश होने के बाद धूप निकलने पर इसका संक्रमण अत्यधिक तेजी से सक्रिय हो जाता है। सावधानी ही इसका बेहतर उपचार है। बताया कि वर्ष 2018 में जनवरी से अगस्त माह तक जिले भर में एक लाख 18 हजार 791 मरीजों के रक्त के नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए है। इनमें से 165 रोगियों में धनात्मक मलेरिया होने की पुष्टि हुई। इन्हें उपचार पर रखा गया। सभी रोगी स्वस्थ हैं। मलेरिया अधिकारी ने दावा किया कि डेंगू का जिले में एक भी केस वर्तमान में नहीं है। गठित टीमों ने संभावित कुल 3998 घरों का निरीक्षण किया। 23 घरों में कूलर, टंकी आदि में मलेरिया एवं डेंगू के लार्वा पाए गए। इन सभी गृह स्वामियों को नोटिस जारी किया गया। कुछ दिनों बाद पुन: निरीक्षण करने पर कोई भी लार्वा नहीं मिला।
मलेरिया अधिकारी ने कहा कि विभाग की ओर से जिले कुल 944 परिषदीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के 701 अध्यापकों मलेरिया और डेंगू बचाव के बारे में कार्यशालाओं के माध्यम से विस्तार से बताया गया। एएनएम और आशाओं के माध्यम से भी 1625 गांवों में जागरूकता गोष्ठी कराई गई। इनमें डेंगू, मलेरिया, दिमागी बुखार, जापानी इंसेफिलाइटिस आदि के बारे में जागरूक किया गया। मोहम्मपुर देवमल एवं जलीलपुर ब्लॉक के नगर क्षेत्र के 219 वार्डों तथा करीब 40 बाढ़ग्रस्त गांवों रावली, ब्रह्मपुरी, राजारामपुर, दत्तियाना आदि में लार्वा साइट का छिड़काव कराया गया। मलेरिया अधिकारी के मुताबिक फिलहाल विभाग के पास डेंगू पर वार करने के लिए 388 लीटर मैथालिन, 752 लीटर टैरीफॉस आदि बचाव सामग्री है। इसमें से 250 लीटर दवाई नगर पालिका बिजनौर एवं 150 लीटर दवाई नूरपुर नगर पालिका को दी गई है।
डेंगू के लक्षण
1. अचानक तेज सिर दर्द व बुखार होना।
2. मांसपेशियां एवं जोड़ों में दर्द होना।
3. आंखों के पीछे दर्द होना, जो कि आंखों को घुमाने से बढ़ता है।
4. जी मिचलाना एवं उल्टी आना, रक्त संचरण का बिगड़ना।
5. नाक, मुंह, मसूड़ों से खून आना अथवा त्वचा पर चकत्ते उभरना।