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नदियों किनारे प्रवासी पक्षी

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बिजनौर। पतित पावनी मां गंगा व बाकी नदियों का पानी और किनारा प्रवासी पक्षियों को खूब रास आ रहा है। गंगा किनारे प्रवासी पक्षी खूब मजे से रहे हैं। वन विभाग जल्दी ही इन प्रवासी पक्षियों की गिनती कराने की तैयारी कर रहा है।
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बिजनौर जिला प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा इलाका बनता जा रहा है। जिले में गंगा, रामगंगा, मालन और खो नदी के किनारे हर साल साइबेरिया व अन्य देशों से प्रवासी पक्षी आते हैं। सर्दी के दौरान यह पक्षी यहीं प्रवास करते हैं। प्रवासी पक्षियों द्वारा जिले में डेरा डालने को अच्छा संकेत माना जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक प्रवासी पक्षी गंगा के आसपास प्रजनन करने के लिए आते हैं। वे गंगा किनारे रेत में ही घोंसला बनाते हैं और अंडे देते हैं। तीन से चार महीने में ही उनके बच्चे इतनी विकसित हो जाते हैं कि वे अपने माता पिता के साथ खुद साइबेरिया के लिए उड़ सकते हैं।
पिछले साल गंगा बैराज, हरेवली व पीली डाम के पास वन विभाग की टीम को 46 प्रजाति के 2700 पक्षी मिले थे। जबकि 2015 में टीम को 38 प्रजातियों के 1881 पक्षी ही मिले थे। जिले की धरती इन पक्षियों को भा गई है।
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ये पक्षी आते हैं
टीम को बर्ड वॉचिंग के दौरान डारटर, ब्लू रॉक, पिनटेल, कामन टेल, लार्ज एरागेट, ग्रे लग ग्रीस, बेडर ग्रीस, पोस्टर पनकोन आदि पक्षी दिखाई दिए।
डीएफओ एम सेम्मारन के मुताबिक जिले की धरती पर प्रवासी पक्षियों को भा गई है। जल्दी ही पक्षियों की गिनती कराई जाएगी।
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