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धनतेरस पर बीस साल बाद आया पांच महायोग का महासंयोग

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धनतेरस पर बीस साल बाद आया पांच महायोग का संयोग
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क्रासर-
चंद्रमा और मंगल का एक साथ कन्या राशि में आने से बनता है लक्ष्मी योग
सूर्य का राशि का परिवर्तन तुला संक्रांति में आने का महायोग
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा। धनतेरस पर बीस साल बाद पांच महायोगों का संयोग बना रहा है। जो समृदिकारक है, खरीदारी का शुभ महायोग योग है। इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र भी है। चंद्रमा और मंगल एक साथ कन्या राशि में आने से लक्ष्मी योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार प्रदोष काल में सोना, चांदी, तांबा, धातु से बनी किसी भी वस्तु की खरीदारी करना शुभ और लाभप्रद रहेगा। धातु के अलावा किसी भी वस्तु की खरीद-फरोख्त करना भी शुभ और लाभकारी रहेगा। ऐसे शुभ लग्न मुहूर्त में की गई खरीदी घर में लक्ष्मी लेकर आएगी। अमृत के समान चिरस्थायी रहेगी। धनवर्षा होगी।
दिवाली से दो दिन पहले धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। 17 अक्टूबर को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। कार्तिक कृष्णपक्ष त्रयोदशी के दिन अमृत कलश लेकर भगवान धनवंतरी समुद्र से प्रगट हुए थे। इसी कारण धनतेरस को अबुझू मुहूर्त भी कहा जाता है। इस दिन जो भी शुभ कार्य व खरीदारी कि जाए जो वह अमृत के समान अमर चिरस्थायी रहती है। धनतेरस के दिन चंद्रमा व मंगल एक साथ कन्या राशि में होने से लक्ष्मी योग बन रहा है। सूर्य-बुध के एक साथ आने से बुधादित्य योग एवं सूर्य का राशि परिवर्तन होने से तुला संक्रांति महायोग व प्रदोष योग, ब्रह्मयोग होने से पांच महायोग के संयोग से धनतेरस के दिन ऐसा महायोग बीस साल बाद आया है। ऐसा शुभ योग खरीदारी के लिए शुभ रहेगा।
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बाबा गंगानाथ मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि करीब बीस साल बाद धनतेरस पर यह महायोग बन रहा है। इस दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र भी है। जो बहुत ही शुभ होता है। पांच गृहों को एक साथ आना शुभ माना जाता है। ऐसे में शुुुभ महासंयोग में की गई खरीदारी शुभ और लाभकारी होती है। घर में लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। प्रदोष काल में खरीदारी करना शुभ रहेगा।
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प्रदोषकाल में खरीदारी का महायोग
अमरोहा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार धनतेरस पर इस बार पांच महायोग का महासंयोग बनने के कारण यूं तो पूरे दिन ही खरीदारी करना शुभ रहेगा। लेकिन इसमें भी कुछ शुभ मुर्हूत विशेष रहेंगे। जैसे की सुबह 8.45 से 11.3 तक वृषक लग्न, दोपहर 2.49 से शाम 4.17 बजे तक पूर्ण लग्न, शाम 7.11 से रात्रि 9.14 तक वक्र लग्न है। सबसे श्रेष्ठ प्रदोष काल में यानि सूर्य अस्त होने के बाद 5.46 से 9.15 बजे तक खरीदारी का सबसे श्रेष्ठ मुर्हूत है। क्योंकि प्रदोष काल में धन के देवता कुबेर का वास होता है। इसी लिए प्रदोष काल में की गई खरीदारी से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
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