रेहड़। गांव सादकपुर में बकरीद पर कुर्बानी के पशुओं को गैर परंपरागत मार्गों से ले जाने पर हिंदू समुदाय में पुलिस प्रशासन के खिलाफ उबाल है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में नई परंपरा शुरू कर दी गई है, जबकि कुर्बानी के पशु बनैली नदी के रास्ते से होकर मानियावाला जाते रहे हैं।
गांव सादकपुर निवासी साजिद, रियासत, आबिद, इंतजार, अकबर, जाबिर, नवाब सलीम, नाजिम आदि ने बताया कि वह हर साल कुर्बानी के पशुओं को बनैली नदी के रास्ते से मानियावाला लेकर जाते हैं। मानियावाला में ही उनके पशुओं की कुर्बानी होती है, लेकिन इस बार तेज बारिश के चलते बनैली नदी उफान पर आ गई। बनैली नदी से कुर्बानी के पशुओं को लेकर गुजरना जोखिम भरा है। इसलिए वह इन पशुुुओं को मुख्य सड़क मार्ग से मानियावाला ले जाना चाहते थे। जब इसकी भनक गांव के दूसरे समुदाय के लोगों विरोध करते हुए उनके पशुओं को ले जाने से रोक दिया। दोपहर तक उनके पशुओं की कुर्बानी नहीं दी जा सकी। हिंदू समुदाय के विरोध के चलते मामले की सूचना पुलिस प्रशासन को दी गई। सीओ विमल किशोर यादव मय फोर्स गांव में पहुंचे। विशेष समुदाय ने पुलिस प्रशासन के सामने को समस्या को रखा। पुलिस ने विरोध कर रहे हिंदू समुदाय के लोगों को समझा का समस्या का निदान कराने का प्रयास किया, लेकिन जब उनकी सहमति नहीं बनी तो ईद की महत्ता को समझाते हुए पुलिस प्रशासन ने कुर्बानी के इन पशुओं को छोटे हाथियों में भरवाकर गैर परंपरागत मार्ग से निकाल दिया। इससे हिंदू समुदाय के लोगों में और आक्रोश पैदा हो गया। गांव के नरेश, घासीराम, ग्राम प्रधान पूरन सिंह, गजेंद्र सिंह, मुहित गहलोत, राकेश चौहान, हरपाल, फूल सिंह, विमल, जीवन सिंह ने पुलिस प्रशासन के निर्णय पर हिंदू समुदाय की भावनाओं पर कुठारघात करने का आरोप लगाते हुए चेताया कि यदि कुर्बानी के बाद विशेष समुुदाय के लोग गैर परंपरागत मार्ग से मीट लेकर सादकपुर लाने का प्रयास किया तो विरोध होगा।
वादीगढ़ चौराहे पर फोर्स तैनात: सीओ
सीओ वीके यादव का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कुर्बानी का मीट किसी भी हालत में गैर परंपरागत मार्ग से सादकपुर न जाने पाएं। इसके लिए वादीगढ़ में फोर्स तैनात कर दी गई है। विशेष समुदाय के लोगों को केवल परंपरागत मार्ग से मीट लाने दिया जाएगा।
कुर्बानी के बाद मीट तो परंपरागत मार्ग से ही लाएंगे: एसडीएम
एसडीएम आजद भगत सिंह का कहना है कि विशेष समुदाय के लोगों को हिदायत दी गई है कि वे कुर्बानी के बाद मीट पहले की तरह से ही परंपरागत मार्ग से लेकर गांव में आएंगे। गैर परंपरागत मार्गों से मीट किसी भी दशा में सादकपुर नहीं लाने दिया जाएगा। एसडीएम का यह भी कहना है कि प्रशासन की ओर से बनैली के पानी को रोकने का प्रयास किया गया। लेकिन नदी का पानी कम न होने से दिक्कत आई।