जिले के सरकारी अस्पतालों में नहीं हेपेटाइटिस के गंभीर मामलों का इलाज
बिजनौर।
हेपेटाइटिस का कोई मरीज कोमा में चला जाए तो उसका इलाज बिजनौर में संभव नहीं है। उसे मेरठ व दिल्ली के लिए रेफर किया जाता है। हेपेटाइटिस के सामान्य रोगियों के इलाज के लिए जिले के सरकारी अस्पातल में पूरी व्यवस्था है।
हेपेटाइटिस को लेकर लोग काफी जागरूक हैं। हेपेटाइटिस होने पर मरीज तुरंत चिकित्सक के यहां उपचार के लिए पहुंच जाता है। इस बीमारी में लापरवाही के जानलेवा होने को लेकर लोग जागरूक हैं। मरीज इसमें लापरवाही करे तो वह कोमा में भी जा सकता है। इसके बाद जिले में किसी सरकारी अस्पताल में उसका इलाज नहीं हो पाता। जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी पर सिर्फ सामान्य रोगियों को ही इलाज संभव है। हालांकि 90 प्रतिशत मरीज जल्द सही हो जाते हैं।
सीएमएस डॉ. राकेश दुबे ने बताया कि जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस के सामान्य रोगियों के उपचार की पूरी व्यवस्था है। पर्याप्त मात्रा में दवाइयों के साथ ब्लड की जांच के लिए लैब है। गंभीर मामलों में मरीज को मेरठ व दिल्ली रेफर किया जाता है। हेपेटाइटिस में मरीज को उपचार के साथ-साथ आराम की सख्त जरूरत होती है। सीएमओ डॉ. राकेश मित्तल ने बताया कि हेपेटाइटिस पहले सप्ताह बढ़ता है, दूसरे सप्ताह स्थिर रहता है तथा तीसरे सप्ताह नीचे की ओर आता है।