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हवा हवाई हो रहा सर्वे, जिले में पकड़े गए 12701 फर्जी सट्टे

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बिजनौर। जिले मे फर्जी सट्टों की बाढ़ आ गई है। गन्ना विभाग की अब तक की जांच में 12 हजार 701 फर्जी सट्टे मिले हैं। फर्जी सट्टों से पेराई सीजन में 25 लाख क्विंटल गन्ने की हेराफेरी हो रही थी। आधार कार्ड और खतौनी की जांच में ये मामले पकड़ में आए हैं। आगे की जांच में फर्जी सट्टों का आंकड़ा बढ़ सकता है। शासन ने फर्जी सट्टा धारकों के मूल सट्टे निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। जिला गन्ना अधिकारी दफ्तर ने आदेशों पर अमल शुरू कर दिया है।
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जिले में नौ गन्ना समितियां हैं। गन्ना आयुक्त के निर्देश पर समिति वार टीम बनाकर गांव गांव फर्जी सट्टों की जांच की जा रही है। आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक खाते व खतौनी को आधार बनाकर यह जांच हो रही है। गन्ना विभाग के जिला सांख्यिकी अधिकारी विकल भारती के अनुसार जिले में 22 सितंबर तक पांच हजार 683 मृत सट्टे चलते मिले हैं। 170 सट्टे डबल मिले हैं अर्थात एक नाम से दो दो सट्टे चल रहे थे। एक हजार 338 सट्टे ऐसे मिले हैं जिनके पास कोई खेती की जमीन नहीं है। तीन हजार 979 किसानों के सट्टे जोत से अधिक थी। भारती के मुताबिक डबल, भूमिहीन व जोत से अधिक सट्टों का गन्ना रकबा चार हजार 645 हेक्टेयर है। इनका बांड 25 लाख क्विंटल गन्ने का है। मृतक सट्टों के वारिस नहीं बनने पर गन्ना सप्लाई बढ़ सकती है। गन्ना आयुक्त के निर्देश पर फर्जी सट्टों को नोटिस भेज दिए हैं। यदि तय समय में इनका जवाब नहीं मिलता या असंतोष जनक मिलता है तो फर्जी सट्टाधारकों के मूल सट्टों को फर्जी मानकर निरस्त कर दिया जाएगा। इसके बाद ये किसान चीनी मिलों पर गन्ना नही डाल सकेंगे।
जिला गन्ना सांख्यिकी अधिकारी के अनुसार गन्ना आयुक्त के आदेशों पर फर्जी सट्टों के मामलों मे विभागीय कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। हल्का सुपरवाइजर सट्टा बनाने के लिए किसान के गांव जाकर खेती की जमीन के रकबे की अभिलेखों से पुष्टि करता है। सुपरवाइजर की संस्तुति पर सट्टा बनता है। सट्टा निर्धारित होने में संबंधित चीनी मिल क्षेत्र की भी भूमिका है। इसलिए दोषी मिलने पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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मिल कर्मचारी हवा में करते थे सर्वे
गन्ना सर्वे का काम अब तक चीनी मिल के कर्मचारियों द्वारा किया जाता था। मिल के कर्मचारी सर्वे में मनमानी करते थे। बिना मौके पर जाए ही किसानों की जमीन व फसल की रिपोर्ट हवा में बना दी जाती थी। इस बार गन्ना विभाग ने पहली बार सर्वे किया तो यह मामले पकड़ में आए।

कहीं किसान को हो न जाए नुकसान
इस साल भी गन्ना समितियों के काफी कर्मचारियों ने पुराने कागजों के आधार पर सर्वे कर दिया है। किसानों की जमीन और फसल कागजों में वो ही दिखा दी जो पिछले साल थी। अगर किसी किसी ने जमीन बेची तो उसकी जमीन कम करके दर्ज नहीं की गई। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

आधार नंबर और खतौनी से हुआ खुलासा
फर्जी सट्टे पकड़ने में आधार नंबर और जमीन की खतौनी ब्रहास्त्र बन गए हैं। इनके आधार पर ही सारे मामले पकड़ में आए हैं। पहले किसानों से केवल घोषणापत्र लिया जाता था। किसान जमीन के कॉलम में जो भी लिख देता था, वही उसकी जमीन मान ली जाती थी। लेकिन इस बार किसान की खतौनी लेकर जमीन की जांच की गई है।

माफिया के रहते है वारे न्यारे
जिन किसानों के पास जमीन नहीं है या सट्टे डबल हैं उनके सट्टे गन्ना माफिया व तौल क्लर्क की जालसाजी से चलते हैं। जिन किसानों के पास गन्ने की कम पर्ची होती हैं, गन्ना माफिया उनका गन्ना कम कीमत पर खरीदकर मिलों को भूमिहीन किसानों के सट्टे पर बेचते हैं। भूमिहीन किसान व तौल क्लर्क इसमें कमीशन खाते हैं।

301 किसानों के सटटे फर्जी पाए
हल्दौर। सहकारी गन्ना विकास समिति क्षेत्र में अभिलेखों की जांच में 301 किसानों के सट्टे फर्जी पाए गए हैं। गन्ना सचिव ने फर्जीवाडे़ में लिप्त किसानों के खिलाफ कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक ने बताया कि क्षेत्र के किसान अपने भू अभिलेख समिति कार्यालय में जमा कर दें। किसानों को भू अभिलेख जमा करने के लिए समिति कार्यालय पर 24 सितंबर से 29 सितंबर तक छह दिवसीय सट्टा प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है।
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