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गन्ना मूल्य वृद्धि के नाम पर मजाक, केवल 3.17 प्रतिशत की हुई वृद्धि

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बिजनौर। प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना मूल्य में केवल दस रुपये की वृद्धि की गई है। अर्ली प्रजाति के गन्ने का मूल्य 325 व सामान्य प्रजाति के गन्ने के दाम 315 रुपये प्रति क्विंटल किए गए हैं। गन्ना मूल्य में केवल 3.17 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी की गई है। गन्ने के दामों में नाम मात्र की वृद्धि होने से जिले के किसानों में रोष है। किसान इस दाम को बहुत कम बता रहे हैं। यहां तक कि चीनी के मूल्यों को देखते हुए खुद शुगर मिल के अधिकारी गन्ने के दामों में 30 से 35 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि का अनुमान लगा रहे थे। लेकिन सरकार ने मूल्यों में केवल दस रुपये की वृद्धि की है।
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गन्ना उत्तर प्रदेश के किसानों की प्रमुख फसल है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 15 लाख किसान गन्ने की खेती करते हैं। बीते साल चुनावी सीजन में गन्ने के मूल्यों में 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई थी। बीते दो सालों से चीनी और गुड़ के दामों में तेजी देखने को मिल रही है। इसके अलावा चीनी की रिकवरी में भी वृद्धि हुई है। चीनी की रिकवरी 13 प्रतिशत तक जा पहुंची है। गन्ना के दाम बढ़ाने के लिए इस समय आदर्श परिस्थितियां थीं। किसान गन्ने के दामों में दस प्रतिशत की वृद्धि तय मानकर चल रहे थे। पिछले साल अर्ली प्रजाति के गन्ने के दाम 315 रुपये प्रति क्विंटल थे। किसान इस बार दाम 350 रुपये प्रति क्विंटल तक होने की आस जगाए बैठे थे, लेकिन सरकार के इस फैसले ने किसानों को जोर का झटका दिया है।
सबसे मीठे गन्ने वाले जिले के किसान निराश
नजीबाबाद में आयोजित सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा ने जिले के गन्ने को देश में सबसे मीठा बताया था। कहा कि बिजनौर जिले के किसान बहुत मेहनती हैं। गन्ने के साथ यहां के लोग भी मीठे हैं। इस पर किसानों को भी लगा था कि गन्ने के दामों में बढ़ोतरी होगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो पाया।
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सरकार के पहले साल में नहीं बढ़ा मूल्य
आमतौर पर सरकार किसी नई सरकार के पहले साल या चुनावी साल में गन्ने के दाम बढ़ाने की परंपरा रही हैं। सपा ने भी पहले साल में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की थी, लेकिन भाजपा सरकार में गन्ने के दाम में केवल दस रुपये प्रति क्विंटल की ही वृद्धि की गई।
बसपा सरकार में गन्ना मूल्य
साल सामान्य प्रजाति अर्ली प्रजाति
2007-08 110 115
2008-09 140 145
2009-10 165 170
2010-11 205 210
2011-12 240 250
सपा सरकार में भाव
2012-13 280 290
2013-14 280 290
2014-15 280 290
2015-16 280 290
2016-17 305 315
भाजपा सरकार में भाव
2017-18 315 325
नोट:गन्ने के दाम रुपये प्रति क्विंटल में हैं।
गन्ना मूल्य हर बार चुनाव में बड़ा मुद्दा बनता है। साल 2012 में सभी दलों ने गन्ना मूल्य 350 रुपये प्रति क्विंटल दिलाने का दावा कर रहे थे। लेकिन साल 2017-18 के पेराई सत्र में भी गन्ना मूल्य 325 रुपये तक ही पहुंच पाया है। जबकि चीनी और गुड़ के दामों में लगातार उछाल आ रहा है।
साल चीनी गुड़
अक्तूबर 2012 2900 2280
अक्तूबर 2013 2920 2770
अक्तूबर 2014 2900 2393
अक्तूबर 2015 2610 2465
अक्तूबर 2016 3639 3210
अक्तूबर 2017 3885 4000
नोट:चीनी के आंकड़े शुगर मिलों व गुड़ के आंकड़े मंडी से लिए गए हैं। इस साल चीनी के दाम 3800 रुपये प्रति क्विंटल से भी अधिक जा चुके हैं।

गन्ने से बनता है बहुत माल
भाकियू के मंडल अध्यक्ष अतुल कुमार के अनुसार एक कुंतल गन्ने से करीब 13 किलो चीनी तक बनती है। इसके अलावा करीब 30 किलोग्राम खोई व साढ़े चार किलोग्राम शीरा बनता है। शुगर मिलें शीरे से एथनॉल भी बनाती हैं। कुल मिलाकर एक क्विंटल गन्ने से 700 रुपये से भी ज्यादा का माल तैयार हो रहा है।
आजाद किसान यूनियन के संयोजक राजेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने किसानों की झोली में कुछ भी नहीं दिया है। कम से कम 400 रुपये गन्ना मूल्य होना चाहिए था। फसल की लागत बहुत बढ़ गई है। भाजपा सरकार किसान के विरोध में काम कर रही है और किसान को खत्म करना चाहती है। भाजपा सरकार उद्योगपतियों की सरकार है। किसानों से सरकार का कोई मतलब नहीं है।
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार भाजपा सरकार भी मिल मालिकों से रुपये खाने में लग गई है। भाजपा ने फसलों की लागत का डेढ़ गुना मूल्य देने का वादा किया था। इस हिसाब से गन्ना मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए था। ये गन्ना मूल्य मंजूर नहीं है। इसके खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
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