22,156 किसानों में से 7,756 के ही हुए एक लाख माफ
बिजनौर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ऋण माफी की योजना का लाभ महिलाओं को भी मिला है। ऋण माफी की पहली सूची में जिले के 22,156 किसानों का ऋण माफ हुआ है, इसमें 7,756 किसानों का पूरा-पूरा एक लाख रुपया माफ हुआ है, इनमें करीब 2000 महिलाएं भी शामिल हैं।
सपा सरकार में केवल उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के 9,161 किसानों का 23.75 करोड़ रुपया माफ हुआ था। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ऋण मोचन योजना में पहली सूची में ही जिले के 22,156 किसानों का 146.96 करोड़ रुपया माफ हो चुका है। दूूसरी सूची में भी करीब 27500 किसानों का करीब 180 करोड़ रुपया माफ होना है। ऋण माफी योजना का लाभ बड़ी संख्या में महिला किसानों को भी मिला है। जिले में काफी परिवारों की महिलाओं के नाम भी जमीन है। योजना की पात्रता में शामिल महिलाओं का ऋण माफ किया गया है। पहली सूची में करीब दो हजार महिलाओं का ऋण माफ हुआ है।
नाम गांव राशि
तुलसी राजा का ताजपुर 100000
प्रेमवती रघुदासपुर 100000
खुर्शीदा बेगम मसीत 100000
मुनेश्वरी देवी हसन अलीपुर 100000
क्रांति देवी फिरोजपुर रूपचंद 100000
कोमल देवी सतवई 100000
संगीता त्यागी दरबारपुर 100000
मोमिना शाहजहांपुर रोशन 100000
नविता देवी बहादरपुर खुर्द 100000
केशो देवी आबिदपुर 100000
कौशर जहां महमूदपुर बुजूर्ग 100000
समलेश कुमारी सेह 100000
नौता देवी झलरी औरंगपुर तारा 100000
पुष्पा देवी हैजरपुर 100000
संपदा धारूपुर 100000
संतरी देवी मच्छमार 100000
कृष्णा ककराला 100000
नोट : यह आंकड़े जिला कृषि अधिकारी कार्यालय से लिए गए हैं।
यह है ऋण माफी का फार्मूला
ऋण माफी में 25 बीघा तक जमीन वाले किसानों को शामिल किया गया है। ऐसे किसान जिन्होंने 31 मार्च 2016 से पहले फसली ऋण लिया था और 31 मार्च 2017 से पहले जमा नहीं किया, उस ऋण राशि में से एक लाख तक का रुपया माफ होगा। किसी पर चाहे एक पैसे का ऋण होगा या एक लाख का, पात्र होने पर माफ किया जा रहा है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. प्रमोद मिश्रा के अनुसार ऋण मोचन योजना में काफी महिलाओं का ऋण भी माफ हुआ है। जो भी योजना का पात्र होगा, उसका ऋण माफ होगा ही।
महज सात और आठ पैसे भी हुए माफ
बिजनौर। प्रदेश सरकार की ऋण मोचन योजना में 25 बीघा तक जमीन वाले किसानों का कर्ज माफ हो रहा है। इन किसानों ने 31 मार्च 2016 से पहले जो कर्ज लिया था और उसमें 31 मार्च 2017 तक जो राशि जमा नहीं की थी, उसमें से एक लाख रुपये तक का ऋण माफ हुआ है। योजना की घोषणा के बाद जिले के किसान काफी खुश थे। राजस्व विभाग से पात्र किसानों का सत्यापन कराया गया। जिले के 22,156 किसानों का 146.96 करोड़ का ऋण पहली सूची में माफ किया गया। लेकिन जब ऋण माफ होने वाले किसानों के नाम सामने आए तो सभी दंग रह गए। किसानों का कुछ पैसे से लेकर दो-चार रुपये का ऋण माफ किया गया है। हालांकि यह भी सच है कि इन किसानों को पता नहीं था कि ये बैंकों के कर्जदार हैं। भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार कर्ज माफी के नाम पर किसानों से धोखा किया गया है। दो चार रुपये या दो चार सौ रुपये का कर्ज माफ होने से किसान को क्या लाभ होगा। सरकार को सभी किसानों का शत प्रतिशत कर्जा माफ होना चाहिए।
किसान गांव राशि
बलिया नगीना नौ पैसे
चरन सिंह बास्टा 84 पैसे
हीरा मंडावर तीन रुपये
भागेश अफजलगढ़ छह रुपये
जसवंती नजीबाबाद 16 रुपये
महेंद्र बिजनौर 57 रुपये
रईस बेग किरतपुर 62 रुपये
दयाराम किरतपुर 91.52 रुपये
पदमा देवी नहटौर 115 रुपये
बलजीत सिंह धामपुर 125 रुपये
यह सूची कृषि विभाग से ली गई है।
ऋण माफी योजना में 68 रुपये माफ 2500 बाकी
नहटौर। ऋण माफी में किसान असमंजस की स्थिति में फंसते नजर आ रहे हैं। एक किसान का 68.61 रुपये कर्ज माफ हुआ। अब भी किसान पर 2550 रुपये ऋण निकल रहा है। बैंक इस बकाया राशि को जमा कराने के लिए कह रहा है। कई किसानों के 100 रुपये से भी कम ऋण माफ हुए हैं। गांव फिरोजपुर निवासी खूब सिंह ने स्थानीय पीएनबी की शाखा से 90 हजार रुपये का कृषि कार्ड बनवाया था। ऋण माफी की समय सीमा से पूर्व ही उसने अपने खाते को खत्म करने के लिए बैंक में एक लाख दो हजार रुपये की राशि जमा की थी। उसने बैंक से अपना खाता बंद करने के लिए कहा था। अब इस किसान का नाम ऋण माफी योजना में आ गया। उसका 68.61 रुपये ऋण माफ हुआ। लेकिन उस पर 2550 रुपये का ऋण बताया जा रहा है। किसान का कहना है कि वह अपने खाते का पूर्ण ऋण जमा कर चुका है। अब गलत तरीके से उस पर ऋण निकाला जा रहा है।
बैंक की लापरवाही बनी किसानों की मुसीबत
किसानों का कहना है कि किसान अपने कार्ड की बकाया राशि को जमा करने के बाद खाता बंद करने को कहता है। लेकिन बैंक में उसके खाते को बंद नहीं किया जाता है। उस खाते में बैंक कुछ बकाया छोड़ देता है। ऐसे खातों में ऋण चलता रहता है। खाता चलने के दौरान उस खाते से फसल बीमा भी काट लिया जाता। ऐसे में फसल बीमे का ऋण भी किसानों के खाते में जुड़ जाता है। सैकड़ों किसानों के इस प्रकार की ही खाते ऋण माफी की सूची में आए हैं। किसानों ने पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। बताया जाता है कि सैकड़ों किसान ऐसे हैं, जिनके 100 रुपये से कम के ऋण माफ हुए हैं। पीएनबी प्रबंधक अनुज कुमार का कहना है कि संबंधित खाते में फसल बीमा की रकम कटने के बाद ही बकाया राशि दर्शाई गई है।
ऋण माफी योजना से कर्ज न देने वाले लाभांवित
नींदडू़। सरकार द्वारा किसानों के लिए जारी की गई ऋण माफी योजना से बैंकों का कर्ज चुकता नहीं करने वाले किसानों को लाभ हुआ है, छोटे और मंझौले किसानों के लिए यह योजना अलाभकारी, छलावा मात्र है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के ब्लाक महासचिव हरिराज सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने किसानों के साथ फसल की लागत का दुगना लाभकारी मूल्य दिए जाने के अपने वादे को पूरा नहीं किया है। कर्ज माफी की घोषणा के समय छोटे व बड़े किसानों का जिक्र नहीं था, किंतु अब उनमें भेद किया जा रहा है। ऐसा करने से समय पर ऋण चुकता करने वाले छोटे और मंझौले किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ, जबकि अपने कर्ज की अदायगी नहीं करने वाले बड़े किसानों को ऋण माफी योजना से फायदा पहुंचा।
ब्याज भी माफ कराना चाहते हैं किसान
नींदडू़। किसान हाजी अनीस अहमद का कहना है कि सरकार की ओर से फसल ऋण मोचन योजना के तहत जिन किसानों का कर्ज (मूलधन) माफ किया गया है। उनसे बैंकों द्वारा ब्याज की धनराशि जमा कराई जा रही है, जबकि किसान उसकी भी माफी चाहते हैं। ऋण माफी की बाबत पूछे जाने पर भारतीय स्टेट बैंक की स्थानीय शाखा के प्रबंधक वीके सिंह ने बताया कि उन्हें 79 किसानों का कर्ज माफ किए जाने की सूची प्राप्त हुई है। इनमें से कुछेक किसानों को अमरोहा में आयोजित कार्यक्रम में नो ड्यूज दे दिए गए थे। शेष किसानों को शीघ्र ही कार्यक्रम आयोजित कर प्रमाण पत्र दे दिए जाएंगे।