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पश्चिमी यूपी में डिप्थीरिया के गंभीर रोगियों नही होता इलाज

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बिजनौर। जिला में डिप्थीरिया से एक बच्चे की मौत हो चुकी है, जबकि पांच बच्चों में डिप्थीरिया के लक्षण मिलने स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वेस्ट यूपी में डिप्थीरिया का इलाज न होने के कारण मरीजों को दिल्ली रेफर किया जाता है।
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डिप्थीरिया के गंभीर रोगियों को उपचार के दौरान एडीएस (एंटी डिप्थीरिया सिरम) इंजेक्शन दिया जाता है। यह सिरम मेडिकल कॉलेज मेरठ, यहां तक की वेस्ट यूपी के प्राइवेट हॉस्पिटल में भी उपलब्ध नहीं है। रोगियों को उपचार के दिल्ली भेजा जाता है। एडीएस को भारत में एक मात्र हैदराबाद की बींस बायो प्रोडक्ट लिमिडेट कंपनी सिर्फ डिमांड पर तैयार करती है। कंपनी को ऑर्डर के बाद एडीएस सप्लाई करने में करीब दो माह का समय लगता है। बाल रोग विशेषज्ञ डा.केके सिंह के मुताबिक डिप्थीरिया के गंभीर मामलों में पीड़ित बिना एडीएस के सही हो भी जाता है, तो पीड़ित के शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं। सीएमओ डा.राकेश मित्तल ने बताया कि एडीएस सिर्फ दिल्ली के महर्षि वाल्मीकि हॉस्पिटल में उपलब्ध होता है। बिजनौर से सभी गंभीर मामलों में मरीज को दिल्ली रेफर किया जाता है।

बच्ची मे मिले डिप्थीरिया के लक्षण
मंडावर के गांव राजारामपुर निवासी राधा (4) पुत्री महीपाल सिंह को पिछले एक सप्ताह से बुखार व गल्ले में दर्द हो रहा था। परिजनों ने राधा का निजी अस्पताल में उपचार कराया, लेकिन उसको आराम नहीं मिला। उन्होंने शुक्रवार को राधा को जिला अस्पताल मेें दिखाया। डा. केके सिंह के अनुसार बच्ची में डिप्थीरिया के लक्षण मिले हैं। बच्ची को भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया गया है व बच्ची के थूक का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा। अगर रेफर करने की जरूरत पड़ी तो बच्ची को दिल्ली भेजा जाएगा।
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