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गन्ने की फसल में लगी तनाभेदक बीमारी

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हल्दौर। क्षेत्र के कई स्थानों पर गन्ने की हजारों बीघा अगैती फसल में कनसुआ (तना भेदक) रोग लगने से उसका पत्ता पीला पड़कर सूखने लगा है। किसान गन्ने की फसल में रोग लगने से उसके उत्पादन को लेकर चिंतित हैं।
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क्षेत्र में अधिकांश किसानों ने गन्ने की अर्ली प्रजाति 038 बो रखी है। पैजनियां, पावटी, नांगलजट, कड़ापुर, शरीफपुर, अम्हेड़ा, खासपुरा आदि गांवों में खड़ी गन्ने की हजारों बीघा फसल कनसुआ रोग की चपेट में आ गई है। मनोज त्यागी, प्रमोद चौहान, अशोक कुमार, सतीश त्यागी, कैलाश चौधरी आदि का कहना है कि कनसुआ रोग लगने से गन्ने के पौधों की पत्ती पीली पड़कर सूखने लगी है। किसान गन्ने के उत्पादन पर इस रोग का प्रतिकूल प्रभाव पड़ने को लेकर आशंकित हैं।
राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी राकेश राणा ने किसानों को कनसुआ (तना भेदक) रोग से बचाव के लिए गन्ने की फसल में क्रावोफ्यूरान थ्री जी, कारटेप फोर जी डेढ़ किलो प्रति बीघा बिखरने की सलाह दी है। क्लोरोवाइरी फास दवा गन्ने की फसल में दो लीटर प्रति बीघा के हिसाब से छिड़काव कर सकते हैं। कनसुआ रोग से बचाव से संबंधित क्रावोफ्यूरान थ्री जी, कारटेप फोर जी, क्लोरोवाइरी फास आदि दवाएं राजकीय कृषि भंडारों पर उपलब्ध है। कृषि बीज भंडार प्रभारी राकेश राणा ने बताया कि किसान बीज भंडार में अपना रजिस्ट्रेशन कराकर उक्त दवाइयां 50 प्रतिशत के अनुदान से पा सकते हैं। किसान को बीज भंडार में दवाई की पूरी कीमत करने के साथ-साथ अपना आधार कार्ड व बैंक की पासबुक की फोटो स्टेट जमा करनी होगी। अनुदान राशि बैंक खाते में बाद में भेजी जाएगी।
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