शेरकोट। शेरकोट में दो दिवसीय तब्लीगी इज्तमा बुधवार को फज्र की नमाज के बाद शुरू हो गया है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मुसलमान शामिल हुए। इस दौरान खिताब करते हुए मौलाना शरीफ दिल्ली मरकज ने अल्लाह के बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया
चुंगी नंबर पांच के पास स्थित मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मौलाना शकीलुर्रहमान साहब ने कहा कि जिन लोगों को इस्लाम की जानकारी नहीं है, वह आलिमो से इसके बारे में बात करें। मुसलमानों को हमेशा अपने अल्लाह और नबी के बताये रास्ते पर चलना चाहिए। जो गरीब है, उन्हें बिना बताए, उनकी मदद करों। जिस चीज को हराम बताया गया हो, उसे कतई करें। मौलाना मेहंदी साहब ने फरमाया कि दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम का इल्म भी लें। प्रत्येक मुसलमान को हर माह तीन दिन जमात में लगाने चाहिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मुसलमानों ने शिरकत की। कार्यक्रम में उनके बैठने के कमेटी के लोगों की ओर से बेहतर इंतजाम किए गए थे।
जायरीनों की सेवा के लिए मेडिकल कैंप
ऱ् कार्यक्रम के बाहर जायरीनों की सेवा के लिए मेडिकल कैंपों का आयोजन किया है। कैपों में कई चिकित्सक बीमार जायरीनों का परीक्षण कर उन्हें निशुल्क दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इस दौरान पूर्व विधायक मोहम्मद गाजी ने कहा कि शेरकोट में इस प्रकार का यह कार्यक्रम 21 साल के बाद हो रहा है। जो बिजनौर के लोगों के बेहद खुशी की बात है।
पूर्व विधायक ने जायरीनों को खजूर, आबे जम जम बांटी
कार्यक्रम में पूर्व विधायक की ओर से खाने पीने का कैंप लगाया गया, जिसमें पूर्व विधायक मोहम्मद गाजी ने स्वयं मौजूद रहकर उन्हें खजूर और आबे जम-जम बांट कर सेवा की। उन्होंने कहा कि जायरीनों की खिदमत करने से उनके मन को जो खुशी मिल रही है वह और किसी काम में नहीं मिलती।
200 से ज्यादा युवकों ने संभाली ट्रैफिक व्यवस्था
कार्यक्रम में हाईवे 74 पर जाम न लगने पाए। इससे निपटने को करीब 200 से ज्यादा लोगों ने ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने में पुलिस प्रशासन का सहयोग किया। खो बैराज से लेकर भनोटी की पुलिया तक करीब तीन किमी तक इन युवकों ने बेहतर ढंग से यातायात व्यवस्था को संभालने में दिनरात एक कर मेहनत की।
जायरीनों की खिदमत में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया
कार्यक्रम में शामिल हुए जायरीनों की खिदमत में नागरिकों ने भी बढ़ चढ़ कर भागीदारी की। मो. अशरफ, मो. फैजान, मो. शाहफहाद, साकिब, अरमान, काजी असलान, हाजी मतलूब ने कहा कि खिदमत करने का मौका कभी कभी मिलता है। ऐसे मौकों को गंवाना नहीं चाहिए।
अरमान, सतीश शर्मा