बिजनौर। कई कंपनियों प्रतिबंधित पेस्टीसाइड के रूप में गांवों में कैंसर की होम डिलीवरी कर रही है। किसान भी अज्ञानता में अपने खेतों में इन प्रतिबंधित पेस्टीसाइड का जमकर छिड़काव कर रहे हैं। इससे जहां भूगर्भ जल भी प्रदूषित होता है, कैंसर होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। प्रतिबंधित होने के बाद भी कंपनियों के सेल्समैन ये पेस्टीसाइड गांव-गांव बेच रहे हैं।
बिजनौर जिला शुगर बाउल कहलाता है। यहां के किसानों ने दो सालों में गन्ने की पैदावार और आमदनी दोनों बढ़ाई हैं। खेतों में पैदावार बढ़ाने के लिए किसान हर तरीका आजमा रहे हैं। मगर, इसमें कुछ तरीके किसान और जमीन की जान दोनों के लिए घातक हो सकते हैं। प्रतिबंधित केमिकल से बने पेस्टीसाइड भी इनमें से एक है। सरकार द्वारा प्रतिबंध होने के बावजूद कंपनियां कई ऐसे पेस्टीसाइड को दुकानों से बेचने के बजाए सेल्समैन के जरिए सीधे गांवों में बेच रहे हैं। किसान भी उत्पादन बढ़ाने के चक्कर में इनका खेतों में जमकर प्रयोग कर रहे हैं। प्रतिबंधित केमिकल से बने पेस्टीसाइइ के प्रयोग के कितने घातक परिणाम हो सकते हैं, किसान इस बात से अनजान हैं।
ये है नुकसान
प्रतिबंधित केमिकल भूगर्भ जल में जाने से यह जल को इतना दूषित कर देता है जितना किसी फैक्ट्री से निकलने वाला पानी होता है। इस पानी के लगातार सेवन से कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
यह हैं प्रतिबंधित केमिकल
एल्ड्रिन, बैंजिन हेक्साक्लोराइड, कैल्शियम साइनाइड, क्लोरडेन, कॉपर एसेटोर्सनाइट, इंड्रिन, इथाइल मरक्यूरी क्लोराइड, इथाइल पेराथिओन, हेप्टाक्लोर, मेनाजोन, निट्रोफीन, पेराक्यूएट डाइमेथली सल्फेट, पेन्टाक्लोरोफिनल, सोडियम मेथेन एसरोनेट, टेट्राडिफोन, टोक्साफेन आदि।
किसान मान्यता प्राप्त दुकानों से मान्यता प्राप्त पेस्टीसाइड ही खरीदें। पेस्टीसाइड की चेकिंग के लिए अभियान चलाया जाएगा। प्रतिबंधित केमिकल से बने पेस्टीसाइड बेचने और बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - ओपी सिंह, डीसीओ।