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मुशायरे में शायरों ने बांघा शमां

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मुशायरे में कलाम पढ़ते शायर
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नूरपुर। शनिवार की रात एमजेड पब्लिक स्कूल में असरी अदब सोसायटी के तत्वाधान में मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे में शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर श्रोताओं को सारी रात बांधे रखा। मुशायरे का उद्घाटन बिजनौर चैयरपर्सन पति शमशाद अहमद अंसारी ने किया। मुशायरे का आगाज अब्दुल कय्यूम जमील की नात पाक से किया गया। मुशायरे में अलीम वाजिद (रुड़की), मेराज बिजनौरी, मेहनाज स्योहारवी, अबुजर नवेद, अब्दुल वहाब हसरत के कलाम पर खूब तालियां बजीं। अलीम वाजिद ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा इज्जत तलाश करते हैं मैयर बेचकर, कितने अमीर हो गए किरदार बेचकर। मेहनाज स्योहारवी ने कहा कि वक्त इंसान को जब कोई सजा देता है, गैर तो गैर है अपना भी सजा देता है, उसकी तारीफ को अल्फाज कहा से लांऊ, जुल्म सहके भी जो जालिम को दुआ देता है। समर जाफ़री देहली ने फरमाया जर्रा-जर्रा बिखर गया हूं मैं, आज कितना संवर गया हूं मैं। असरारुल हक ने कहा कि शराब और गांजा चले नकद लेकर, मगर घर मे आटा उधार आ रहा है। युवा शायर अबुजर नवेद (दिल्ली) ने अपना कलाम कुछ यूं पढ़ा- मिल जाए शहादत भी रहे सर भी सलामत, जीने की तलब है तुझे मरना नहीं आता। अब्दुल वहाब हसरत ने फरमाया कि घर में मुफ़लिसी बच्चे मेरे फाकों की जड़ में है, खिलौने बेचने वाले यहां आवाज मत देना। रफी बढ़ापुरी ने पढ़ा- गुलशन जल के उसने सरेआम लिख दिया, हर एक ख़ता का हम पर इल्जाम लिख दिया। इनके अलावा नईम राजा, नसीम दिलकश, नबील मिकरानी, महबूब अमीन, असलम सीतापुरी, रियाज हनफ़ी, अय्यूब हलचल, असरार अदील ने भी अपने कलाम पेश कर खूब वाही-वाही लूटी। मुशायरा देर रात तीन बजे तक चला। मुशायरे में अकरम जमील, सलीम राजा, नईम अहमद उर्फ पप्पू, यूसुफ कुरैशी, शकील चौधरी आदि का सहयोग रहा। अंत में रियाज हनफ़ी ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
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