खुद से मिले हुए भी जमाना गुजर गया
नजीबाबाद। गीत गजल संगम एकेडमी के मुशायरे में शायरों ने देश व समाज से जुड़ी समस्याओं पर कलाम पेश कर खूब वाह वाही लूटी। शायर शनावर किरतपुरी को फख्र-ए-उर्दू अवार्ड से नवाजा गया।
गीत गजल संगम एकेडमी की ओर से मोहल्ला मुगलूशाह स्थित अब्दुल गफ्फार अंसारी, मुख्तार अंसारी के आवास पर एक मिनी मुशायरा आयोजित किया गया। महेंद्र अश्क की अध्यक्षता में मुशायरे का आगाज अकरम जलालाबादी व कारी शुएब के नातिया कलाम से हुआ।
अख्तर मुल्तानी ने मुद्दत के बाद आज अचानक फिर एक बार/आया तेरा ख्याल तो बैचेन कर गया, डॉ.आफताब नोमानी ने दुशवार रास्तों के सफर से गुजर गया, मैं दूसरों की जिंदगी जीने में मर गया, महेंद्र अश्क ने अब सड़के जागती है ना खुलती है खिड़कियां, वोह क्या गया कि शहर को वीरान कर गया, शनावर किरतपुरी ने वैसे तो मेरे दिल का हर एक जख्म भर गया, लेकिन वोह आदमी मेरे दिल से उतर गया, शाहिद अंजुम ने उनसे मिले हुए भी बहुत दिन गुजर गए, खुद से मिले हुए भी जमाना गुजर गया, डॉ. तय्यब जमाल ने लोगों की खामियों पर नजर रखने में मुझे/ खुद से मिले हुए भी जमाना गुजर गया ने कलाम पेश कर खूब वाह-वाही लूटी। शुएब नफीस के संचालन में आयोजित मुशायरे में एकेडमी ने उर्दू अदब की खिदमत के लिए फख्र-ए-उर्दू अवार्ड से नवाजते हुए शायर शनावर किरतपुरी को प्रतीक चिन्ह और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्तार अहमद, अब्दुल रशीद, नासिर मुल्तानी, मो.गाजी, शहजाद, शमशीर, सुहेल, जुबैर, अबरार आदि मौजूद रहे।