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दो दो साल की सजा

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पुलिस हमले में 14 आरोपियों को सजा
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बिजनौर। एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट डॉ. पल्लवी अग्रवाल ने गांव मुकरपुर सत्ती में हुए पुलिस बल पर फायरिंग, हमला, पथराव करने की घटना में 14 आरोपियों को दो दो वर्ष के कारावास और दो दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोष सिद्ध न होने पर 13 आरोपियों को बरी कर दिया है।
थाना हल्दौर के गांव मुकरपुर सत्ती निवासी मुराली लाल ने 29 अक्तूबर 2012 को पुलिस को सूचना दी कि उसके गांव में मायाराम व निजामुद्दीन पक्ष के लोगों में पत्थरबाजी हो रही है। सूचना पर तत्कालीन थानाध्यक्ष राकेश पालीवाल पुलिस बल के साथ गांव मुकरपुर सत्ती पहुंचे तो उन्होंने देखा कि गांव के लोग, औरतें व बच्चे बदहवास होकर जान बचाने के लिए इधर उधर भाग रहे हैं। पुलिस ने ड्रेगन लाइट जलाकर देखा तो पाया कि निजामुद्दीन, उसके पक्ष के लोग रमजानी के मकान की छत से तथा दूसरे पक्ष के सावेंद्र सिंह व उनके साथी गली में खड़े होकर एक दूसरे पर पथराव व फायरिंग कर रहे थे। पुलिस ने दोनों पक्षों को फायरिंग व पथराव बंद करने की चेतावनी दी तो दोनों पक्ष के लोगों ने पुलिसवालों पर फायरिंग व पथराव शुरू कर दिया।
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पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए एक पक्ष के निजामुद्दीन, रियाज, छिद्दू, शौकत, नदीम, अहसान, नजाकत, इरशाद तथा दूसरे पक्ष के सावेंद्र, विक्रम, तेजपाल, विपिन, नितिन, रावेंद्र को मौके पर गिरफ्तार कर लिया। बाकी लोग हुड़दंग करते हुए भाग गए। इस घटना में एक पक्ष के शौकत व नजाकत तथा दूसरे पक्ष के निपेंद्र व सुनील घायल हुए। सहकारी समिति के चुनाव में निजामुद्दीन पक्ष का प्रत्याशी हार गया था, दूसरे पक्ष का प्रत्याशी जीत गया था। इसे लेकर विजयी प्रत्याशी के समर्थक ढोल बजाकर नारे लगाते हुए जा रहे थे। निजामुद्दीन के घर के पास पहुंचने पर दोनों पक्षों में पथराव व फायरिंग हुई थी। पुलिस को छापेमारी में निजामुद्दीन के घर की छत से चार खोखा कारतूस, गली से तीन खोखा कारतूस मिले थे। दो कार भी पथराव में क्षतिग्रस्त हुई थीं। पुलिस ने इस मामले में 27 लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। कोर्ट ने इस मामले में निजामुद्दीन, रियाज, छिद्दू, शौकत, नदीम, अहसान, नजाकत, इरशाद, सावेंद्र, तेजपाल, विपिन, नितिन, रामेंद्र, मायाराम को दोषी पाते हुए अधिकतम दो दो वर्ष की सजा सुनाई है। इन्हें जानलेवा हमले का दोषी नहीं माना है। लियाकत, अलताफ, रियासत, मुजम्मिल, निपेंद्र, पप्पू, सुनील, ओमपाल, विमल, कजरे, विक्रम, शराफत, जहीर को दोष सिद्ध न होने पर बरी कर दिया है।
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