अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
जिले के इंडिया मार्का हैंडपंप के पानी में खतरनाक तत्व आर्सेनिक पाया गया है। लखनऊ प्रयोगशाला से हुई इसकी पुष्टि के बाद अफसरों में हड़कंप मचा है। यह तत्व अमरोहा ब्लाक क्षेत्र के गांव चौहड़पुर उर्फ मथुरानगर में स्थित हैंडपंपों के पानी में मिला है। एहतियातन जहां अधिकारियों ने हैंडपंपों पर लाल निशान लगा दिए हैं, वहीं रिपोर्ट की और सच्चाई जानने के लिए दोबारा से पानी को जांच के लिए भिजवाया है। अगर दूसरी रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई तो गांव में पाइप लाइन डालने का काम किया जाएगा।
कुछ दिन पहले जल निगम के अधिकारियों ने ब्लाक क्षेत्र के ताजपुर, जब्दा, चौहड़पुर उर्फ मथुरानगर, अटेरना, चकमजदीपुर, जीरखी, इब्राहिमपुर, शेखूपुर ग्राम पंचायत में स्थित इंडिया मार्का हैंडपंपों के पानी के सैंपल भरे थे और परीक्षण को लखनऊ प्रयोगशाला भेज दिए थे। जुलाई माह में उनकी एक-एक कर रिपोर्ट आने का सिलसिला शुरू हो गया। अधिकांश हैंडपंपों के पानी में आयरन तत्व की मात्रा अधिक पाई गई तो कुछ में गंदलापन व नाइट्रेट की अधिकता मिली। अफसर उस समय चौंक गए जब चौहड़पुर के दोनों हैंडपंपों की रिपोर्ट देखी। यहां पानी में आर्सेनिक तत्व पाया गया, जिसको देखते ही अधिकारियों में खलबली मच गई। ऐसा होना भी लाजमी है क्योंकि यह हानिकारक तत्व अभी तक जनपद में नहीं पाया गया था। पहली बार पानी की जांच में आर्सेनिक की पुष्टि ने अफसरों को भी सोचने के लिए विवश कर दिया है। अधिक सच्चाई जानने के लिए पानी के नमूनों को दोबारा से परीक्षण के लिए भिजवाया है।
आर्सेनिक युक्त पानी पीने से ये हो सकती हैं बीमारियां:
त्वचा का फटना
त्वचा का कैंसर
फेफड़े और मूत्राशय का कैंसर
नाड़ी से संबंधित रोग
मधुमेह, दूसरे अंगों का कैंसर
संतोनोत्पत्ति से संबंधित गड़बड़ी।
गर्भस्थ शिशु में विकृति या उसकी मृत्यु
ये हैं आर्सेनिक व आयरन की पानी में मात्रा के मानक
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पीने के पानी में आर्सेनिक की प्रति लीटर मात्रा 0.01 एमजी तय की है, जबकि भारत सरकार ने 0.05 एमजी तक आर्सेनिक का मानक तय किया है। अधिकारियों की मानें तो चौहड़पुर में पानी में आर्सेनिक की मात्रा 0.34 पाई गई है। आयरन 1.0 एमजी होना चाहिए, लेकिन हैंडपंपों के पानी में उसकी मात्रा 2.09, 2.30 से भी अधिक तक आ रही है।
चौहड़पुर में आर्सेनिक युक्त पानी के होने का पता चला है। इसलिए हैंडपंपों पर लाल निशान लगाया गया है। लोगों से उसके इस्तेमाल न करने को कहा गया है। चूंकि अपने क्षेत्र में कहीं आर्सेनिक नहीं है। पूर्वांचल में ही आर्सेनिक युक्त पानी मिलता है। अब यहां भी पुष्टि हुई है। इसलिए और स्थिति स्पष्ट करने के लिए क्रास जांच कराई जा रही है, जिसके तहत दोबारा सैंपल भरकर भेजे गए हैं।
मदन वर्मा, जिला विकास अधिकारी
आर्सेनिक से मुक्ति का उपाय
आर्सेनिक युक्त जल को अगर खुली धूप में 12-14 घंटे तक रख दिया जाए तो उसमें से 50 फीसदी आर्सेनिक उड़ जाता है। उसके बाद उस जल का इस्तेमाल पेयजल के रूप में किया जा सकता है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों के तहत बंगाल कालेज ऑफ इंजीनियरिंग ने कम्युनिटी एक्टिव एलुमिना फिल्टर का निर्माण भी किया है जो पानी से आर्सेनिक निकालने में मददगार साबित हो सकता है।
क्या है आर्सेनिक?
आर्सेनिक एक गंधहीन और स्वादहीन उपधातु है जो जमीन की सतह के नीचे काफी मात्रा में उपलब्ध है। यह रसायन-विज्ञान पीरियोडिक टेबल में नाइट्रोजन, फास्फोरस, एंटीमनी और बिस्मथ ग्रुप का सदस्य है। इसका परमाणु क्रमांक (एटोमिक नंबर) 33 है और परमाणु भार (एटोमिक मास) 74.91 है।
प्रकृति में इन रूपों में उपलब्ध है आर्सेनिक
आर्सेनिक और इसके यौगिक रवेदार (क्रिस्टेलाइन), पाउडर और एमोरफस या काँच जैसी अवस्था में पाये जाते हैं। यह सामान्यत: चट्टान, मिट्टी, पानी और वायु में काफी मात्रा में पाया जाता है। यह धरती की तह का प्रचुर मात्रा में पाए जाना वाला 26वां तत्व है।
कृषि और उद्योगों से पेयजल में पहुंचता है आर्सेनिक
यह वातावरण में प्राकृतिक रूप से मौजूद है, इसके अलावा कुछ कृषि और औद्योगिक गतिविधियों के कारण भी ऐसा हो जाता है। यह भूजल अथवा सतही जल में घुल जाता है और हमारे पेयजल में आ जाता है।
भारत के इन राज्यों में आर्सेनिक का प्रभाव
पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, असम, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश आदि राज्यों में आर्सेनिक का प्रभाव पाया गया है। ज्यादा प्रभावित राज्य पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड हैं।
फसलों के जरिए खाद्य चक्र में शामिल हो जाता है आर्सेनिक
जब खेतों की सिंचाई आर्सेनिकयुक्त पानी से की जा रही हो तो आर्सेनिक का अकार्बनिक स्वरूप पौधों में अवशोषित हो जाता है और इस तरह आर्सेनिक खाद्य चक्र में शामिल हो जाता है।