फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारत मां की गोद में सो गया आजाद कराने वाला लाल

विज्ञापन
विज्ञापन
स्वतंत्रता सेनानी डालचंद का निधन, परिवार में शोक की लहर, सौ साल से अधिक उम्र में भी स्वस्थ्य थे
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
सौ साल से अधिक उम्र के स्वतंत्रता सेनानी डालचंद यादव का सोमवार की दोपहर तीन बजे ह्रदय गति रूकने से निधन हो गया। उनके निधन से परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं उनके घर पर शोक प्रकट करने वालों का तांता लगा रहा। शाम को उनका अंतिम संस्कार हुआ। स्वतंत्रता सेनानी डालचंद यादव का देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा था।
अमरोहा तहसील के गांव कैलबकरी में 16 अक्टूबर वर्ष 1916 में जन्म डालचंद यादव ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह जैसे मतवालों के साथ आजादी की लड़ाई लड़ी थी। बीस वर्ष की अवस्था में आजादी के आंदोलन में कूदे डालचंद गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी भारत मां को मुक्त कराने की कोशिश शुरू कर दी थी। उन्होंने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी जहां हिन्दू मुस्लिम समेत सभी धर्मों के लोग मिल जुलकर साथ रहेंगे।
विज्ञापन

करीब एक सौ दो वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी डालचंद यादव ने सोमवार की दोपहर अंतिम सांस ली। उनके निधन से परिवार ही नहीं बल्कि आस पास के इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। शाम के समय गांव में ही उनके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। वह अपने पीछे तीन बेटे व भरा पूरा परिवार छोड़कर गए हैं। बड़े बेटे भानू प्रताप ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। वह दो बार विधायक का चुनाव लड़ चुके थे। जिला पंचायत सदस्य भी रहे थे। इस दौरान उनके परिजन व पूर्व एमएलसी डा.हरि सिंह ढिल्लो, प्रिंसिपल केपी इंटर कालेज शादपुर कैलाश त्यागी, रोहित चिकारा, सोमपाल, सुभाष त्यागी, सुरेंद्र यादव आदि लोग भी मौजूद थे।

पीलीकोठी में फूंके थे अभिलेख
अंग्रेजों भारत छोड़ों आंदोलन उग्र रूप ले चुका था। गांव पीपली तगा में बनी पीली कोठी में अंग्रेजों की अदालत लगती थी। डालचंद यादव ने अपने तीस साथियों को एकत्र किया और पीली कोठी में घुसकर सरकारी अभिलेखों की होली जला दी थी। सिपाहियों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया था। 27 साथी तो भाग खड़े हुए, लेकिन तीन पकड़े गए थे।
विज्ञापन


आजाद हिन्द फौज में शामिल हुए थे
आजाद की शहादत के बाद डालचंद ने इलाहाबाद छोड़ दिया था और नेता जी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिन्द फौज में शामिल हो गए। सन 1942 के बाद लगातार नेता जी की विंग में रहकर काम किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें