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अष्टम वार्षिक महोत्सव का संपन्न

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अष्टम वार्षिक महोत्सव का संपन्न
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बिजनौर । आर्यसमाज आत्मानंद धाम का अष्टम वार्षिक महोत्सव का समापन श्रद्धा पूर्वक हुआ। इस अवसर पर आर्यसमाज के दस नियमों का अध्ययन नामक पुस्तक का विमोचन किया गया । इससे पूर्व ध्यान योग शिविर, भजन, वेदप्रवचन और यज्ञ हुआ। आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी ने दैनिक यज्ञ संपन्न कराया। इसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर सुख- समृद्धि की कामना की।
रविवार को कार्यक्रम में स्वामी केवलानंद सरस्वती ने कहा कि जो नूतन व पुरातन हैं, जो हमेशा से हैं और जिनका विनाश नहीं हो सकता उसे सनातन अर्थात धर्म कहते हैं। संप्रदायों की रचना कभी ऋषि-मुनियों के हाथों से नहीं हुई। ये मानव की खुद के दिमाग की उपज है। इसलिए महर्षि दयानंद सरस्वती ने संप्रदायों के निराकरण व सत्य सनातन ईश्वर प्रदत्त वैदिक धर्म के प्रचार प्रसार के लिए आर्यसमाज की स्थापना की।
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वैदिक विद्वान आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी ने बताया कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्यसमाज नाम से किसी नवीन कल्पना को न चलाकर सत्य सनातन वैदिक धर्म के सत्संग की स्थापना की है। सांध्य दैनिक चिंगारी के संपादक सूर्यमणि रघुवंशी ने कहा कि आर्यसमाज में व्याप्त अविद्या के विनाश एवं विद्या की वृद्धि में तत्पर हैं। विद्या से सांसारिक अभ्युदय व जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य प्राप्त होता है। आर्य भजनोपदेशक देवेंद्र दत्त सत्यार्थी ने भजन व गीतों से आर्यसमाज के सत्य सनातन वैदिक धर्म के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर रवींद्र कुमार, रेणू, देशबंधु आर्य, निधि आर्या, नीरज शर्मा, महाराज सिंह, बाबूराम आर्य, डा. विमल, मगन देवी, विवेकशीला आदि मौजूद रहे।
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