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सावधान: कभी भी गिर सकता है धामपुर के गांधी नेत्र चिकित्सालय भवन का लिंटर

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धामपुर। जिला नेत्र सहायता समिति की ओर से धामपुर में स्थापित गांधी नेत्र चिकित्सालय का भवन खंडहर में तब्दील हो गया है। अस्पताल में कर्मचारियों ने भवन की दशा को देख कई स्थानों पर यह लिखकर नोटिस लगा दिया है कि भवन का लिंटर कभी भी टूटकर गिर सकता है। इसलिए कोई मरीज लिंटर के नीचे खड़ा न हो।
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जिला नेत्र सहायता नेत्र समिति की ओर से धामपुर में इस अस्पताल की स्थापना सीतापुर गांधी नेत्र चिकित्सालय के संस्थापक स्व. डॉ. मोहनलाल अलीगढ़ और प्रेणता स्व. डॉ. महेश प्रसाद महरे के संयोजन में 1958 में हुआ था। भवन का निर्माण भूतपूर्व डीएम अशरफ अली खां ने 27 जून 1976 में पूर्ण कराया। भवन निर्माण के लिए एक समिति का भी गठन हुआ था। उस दौरान समिति में बतौर अध्यक्ष डीएम बिजनौर लक्षमीचंद , सचिव रामरक्ष पाल सिंह, भवन निर्माण समिति अध्यक्ष शोभाराम अग्रवाल (मैनेजर शुगर मिल धामपुर), मंत्री डॉ. आरपी सिंह चिकित्साधिकारी, कार्यमंत्री विशंभरनाथ माहेश्वरी, सदस्य डॉ. हरिश्चंद आत्रेय, रामचरन लाल अग्रवाल, प्यारेलाल गुप्त, राजेंद्र गोयल रहे। इस अस्पताल के भवन का उद्घाटन धामपुर चीनी मिल के एमडी कुुंवर विजय कुमार गोयल ने रविवार के दिन 27 जून 1976 को किया था।

आम आदमी का अस्पताल है गांधी नेत्र चिकित्सालय
नगर के प्रिंस चौहान, गौरव कुमार, जसवंत सिंह, सचिन चौहान, विमल चौहान, विकास, भूपेंद्र क़ुमार का कहना है कि यह आज के दौर में सस्ता व सुलभ है। आसानी के साथ आम लोगों को इस अस्पताल की सुविधा मुहैया हो जाती है। पहले इस अस्पताल में आंखों का परीक्षण कराने को 10 रुपये प्रति मरीज पर्चा बनता था। पर अब पर्चे की कीमत को बढ़ाकर 20 रुपये प्रति मरीज कर दिया गया है। इस अस्पताल को आधुनिक बनाने को समिति में शामिल सदस्यों व पदाधिकारियों को हरसंभव प्रयास करना चाहिए। नहीं तो यह अस्पताल एक दिन समिति की उपेक्षा से दम तोड़ देगा।
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भवन खंडहर में तब्दील, नहीं हो रही सुनवाई
लोगों का कहना है कि उचित रखरखाव न होने से अस्पताल का अधिकांश भवन खंडहर में तब्दील हो गया है। इसलिए अस्पताल के स्टाफ ने भवन की चाहरदीवारी पर कई स्थानों पर यह लिखकर नोटिस लगा दिया है कि अस्पताल के भवन का लिंटर खस्ताहाल है। कभी भी गिर सकता है। अच्छा है कि इस लिंटर के नीचे खड़े न हो। अस्पताल स्टाफ का कहना है कि वह कई बार इस भवन के जीर्णोद्धार के लिए अस्पताल के पदेन प्रबंधक/ एसडीएम धामपुर आजाद भगत सिंह को अवगत करा दिया गया है। पर उनके स्तर से अभी तक सुनवाई नहीं हो सकी है।

मामला संज्ञान में है, सुधार का प्रयास करेंगे : एसडीएम
अस्पताल के पदेन प्रबंधक/ एसडीएम आजाद भगत सिंह का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में है। पत्रावली मांगी गई है। आर्थिक स्थिति अस्पताल की संतोषजनक नहीं है। वह इस मामले को गंभीरता से लेकर जल्द सुुुधार कराने का प्रयास करेंगे।
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