बिजनौर। जिले के किसान अब कर्जमाफी के सपने देखने छोड़ दें। अब किसानों का कर्ज माफ होने के संबंध में कोई योजना नहीं चल रही है। बैंकों ने भी अनियमित खाते वाले किसानों को नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। इसके बाद भी किसानों ने ऋण जमा नहीं किया तो उनके खिलाफ नोटिस जारी किया जा रहा है।
साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में किसानों की कर्ज माफी चुनावी मुद्दा बना था। सभी दलों ने सरकार बनने के बाद किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। चुनाव में सूबे में भाजपा की सरकार बन गई। योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनते ही कैबिनेट की पहली बैठक में किसानों के कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। बैंकों का कर्ज जमा न करने वाले किसानों को पहले नोटिस भेजा जाता है और फिर आरसी जारी होती है। पिछले साल चुनावी माहौल में कर्ज माफी का मुद्दा छाये रहने के कारण बैंकों ने किसानों की नोटिस या आरसी जारी नहीं की थी। सरकार बनने के बाद शासन स्तर से भी ऐसी कोई कार्रवाई न करने के निर्देश बैंकों को दिए गए थे, लेकिन अब न तो कोई चुनाव है और न ही अब कर्ज माफी के आसार। लेकिन अब भी किसान कर्ज माफी की आस लगाकर केसीसी(किसान क्रेडिट कार्ड) पर बैंकों से लिया गया कर्ज वापस नहीं लौटा रहे हैं। इससे किसान अनजाने में ही अपने ऊपर कर्ज का बोझ बहुत बढ़ा रहे हैं। बैंकों ने ऐसे किसानों को नोटिस व आरसी जारी करनी शुरू कर दी है। जिले में करीब साढ़े तीन लाख किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड है।
469 करोड़ हुआ माफ
ऋण मोचन योजना में अब तक जिले के 72 हजार 562 किसानों का 469 करोड़ 70 लाख रुपये का कृषि ऋण माफ हो चुका है। अब योजना में एनपीए खाते वाले सहकारी बैंक, एसबीआई, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक व यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक, ओरिएंटल बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, इंडियन बैंक, पीएनबी को भी शामिल कर लिया गया है। कुल 20 हजार 296 किसानों का 43.46 करोड़ रुपये का कर्ज माफ हो रहा है।
4353 करोड़ का कर्ज
जिले के किसानों पर सितंबर 2017 तक चार हजार 353 करोड़ रुपये का कर्ज था। इस कर्ज में ब्याज की रकम भी शामिल है। जिस तारीख पर किसान ने कर्ज लिया है, उस तारीख से अगले एक साल के अंदर अगर ऋण में ली गई रकम पर ब्याज जितनी रकम जमा न की जाए तो वह खाता अनियमित मान लिया जाता है। ऐसे खाता धारकों को नोटिस और आरसी जारी होती है।
बढ़ता जाएगा ब्याज का बोझ
केसीसी पर तीन लाख तक का ऋण एक साल में पूरा जमा करने पर बैंकों द्वारा किसान को ब्याज पर तीन प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। समय से ऋण जमा न किया जा तो यह सब्सिडी नहीं मिलती है। साथ ही ऋण जमा न करने पर रकम पर ब्याज बढ़ता जाता है।
अब पांच प्रतिशत आरसी
आरसी जारी होने के बाद पहले खाताधारक को कुल राशि पर दस प्रतिशत अधिक राजस्व विभाग को देना होता था, लेकिन अब नियमों में बदलाव किया गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व सुरेंद्र राम के अनुसार अब अगर किसी बकाएदार के खिलाफ संपत्ति की कुर्की, नीलामी की प्रक्रिया के बाद हवालात में बंद किया जाता है तब उससे पांच प्रतिशत आरसी के शुल्क के रूप में लिया जाएगा। इस कार्रवाई से पहले ही अगर कोई अपनी बकाया राशि जमा कर देगा तो उसे आरसी का कोई शुल्क नहीं देना होगा।
समय से करें ऋण जमा
अग्रणी जिला प्रबंधक अजय कुमार के अनुसार किसानों के लिए वर्तमान में कर्ज माफी की कोई योजना नहीं है। किसान समय से अपना ऋण जमा करें। अनियमित खाते वाले किसानों के खिलाफ नोटिस और आरसी की कार्रवाई की जा रही है।