कोटावाली पुल पर लगातार बढ़ सड़क का गैप
भागूवाला/नजीबाबाद। यूपी-उत्तराखंड सीमा पर स्थित कोटावाली नदी पुल से भारी वाहनों के आवागमन पर उत्तराखंड प्रशासन ने रोक लगा दी है। इसके बावजूद भारी वाहन जोखिम उठाकर पुल से गुजर रहे हैं। चार दिन पहले कोटावाली नदी में आए उफान से पुल के पिलर में दरार आ गई थी। जिससे पुल पर बनी सड़क करीब 16 सेंटीमीटर गैप आने के साथ दो भागों में बंट चुकी है।
नजीबाबाद से हरिद्वार को जोड़ने वाला एकमात्र मुख्य मार्ग कोटावाली पुल से गुजरता है। डेढ़ दशक पहले नदी पर पुल का निर्माण हुआ था। शनिवार को कोटावाली नदी में उफान आने के बाद पुल के बीचोंबीच स्थित एक पिलर में दरार आ गई। माना जा रहा है कि इस दरार के कारण पुल का ऊपरी हिस्सा प्रभावित हुआ। जिससे पुल की सड़क दो हिस्सों में बंट गई। शनिवार को सड़क के बीच करीब चार सेंटीमीटर गैप था। जो सोमवार को बढ़कर 12 सेंटीमीटर हो गया। 24 घंटे के भीतर अब यह गैप बढ़कर 16 सेंटीमीटर से अधिक हो चुका है।
शनिवार को हरिद्वार के डीएम दीपक रावत ने मौका मुआयना कर पुल से भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही वाहनों की गति भी 10 किलोमीटर प्रतिघंटा तक सीमित करने के लिए कहा था। लेकिन हाईवे पर यातायात के भारी दबाव के चलते वाहनों को रोक पाना उत्तराखंड और यूपी प्रशासन के लिए खासा चुनौती भरा हो रहा है। मंगलवार को पुल से आवागमन को वन-वे करना पड़ा। साथ ही जिस स्थान पर सड़क दो भागों में बंट रही है, उससे जुड़े पिलर क्षेत्र में स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं, ताकि चालक वाहनों को धीमी गति से और सावधानी बरतकर गुजार सकें। स्थिति पर नजर रखने के लिए पुल क्षेत्र में दो कर्मचारियों को तैनात किया गया है। मार्ग से वाहन समेत गुजर रहे लोगों कोमल, शमाशद, वहाब, राजकुमार, जसवंत सिंह ने बताया कि पुल पर कंपन महसूस हो रहा है।
नेशनल हाईवे एथॉरिटी ऑफ इंडिया के जेई अमित कुमार ने बताया कि पुल के जिस पिलर में दरार के साथ सड़क दो हिस्सों में बंटी है, उसके नीचे नदी में पानी चल रहा। हालांकि नदी में जेसीबी मशीन से धारा बदलने की कोशिश की गई, मगर कामयाबी नहीं मिली। जेई ने पिलर के आसपास से पानी हटने पर खुदाई कर पिलर की बुनियाद की जांच कर आवश्यक मरम्मत का कार्य कराए जाएगी।