अमरोहा। रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही और अधिकारियों की अनदेखी कभी भी कोई बड़ा हादसा करा सकती हैं। अमरोहा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन की करीब पांच सौ मीटर लाइन जर्जर हो चुकी हैं। पटरी का नीचे का हिस्सा जर्जर होकर गलने के कगार पर पहुंच गया है। जबकि इस ट्रैक से रोजाना पांच से सात ट्रेनें गुजरती हैं। ऐसे में ये ट्रैक हादसों को दावत दे रहा है। वहीं जिम्मेदार उच्चाधिकारियों को सूचना देने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
अमरोहा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन के ट्रैक की एक तरफ की पटरी करीब पांच सौ मीटर से अधिक गल चुकी है। पटरी के नीचे का हिस्सा बुरी तरह से जंग खाकर जर्जर हालत में पहुंच गया है। रेलवे की अनदेखी के चलते पटरी का निचला हिस्सा गलकर गिरने लगा है। इसके बावजूद ट्रैक पर रोजाना अप और डाउन ट्रेनें दौड़ रही हैं। ट्रैक के जर्जर हालत में होने की रेलवे प्रशासन को बहुत पहले से ही जानकारी है। लेकिन रेलवे प्रशासन कानों में रूई डाले बैठा है। आए दिन क्षतिग्रस्त ट्रैकों के कारण होने वाले हादसों से सबक लेते हुए जर्जर हालत के ट्रैक को तुरंत नहीं बदला गया तो कभी भी भयंकर हादसा हो सकता है। ट्रैक पर यात्रियों की जान जोखिम में डालकर ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। जाहिर है कि जर्जर ट्रैक पर रेलें दौड़ाकर रेलवे प्रशासन किसी भीषण हादसे का इंतजार कर रहा है।
मालगाड़ी सहित रोजाना गुजरती हैं 95 ट्रेनें
अमरोहा रेलवे स्टेशन से रोजाना अप डाउन साइड से करीब 95 ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें मालगाड़ी भी शामिल हैं। यहां ट्रेनों के निकालने के लिए कुल पांच लाइन हैं। इनमें दो मेन ट्रैक हैं। इन ट्रेनों और मालगाड़ियों को इन्हीं ट्रैक से निकाला जाता है। वहीं 52 ट्रेनों का अमरोहा स्टेशन पर ठहराव है। जिन्हें प्लेटफार्म नंबर एक, दो और तीन से गुजारा जाता है।
गंभीर मामला नहीं
स्टेशन अधीक्षक सरदार सिंह ने बताया कि ने कहा कि ट्रैक दरअसल मिट्टी में दबा हुआ था। इसलिए इसके गलकर खराब होने की जानकारी नहीं हुई। ट्रैक से पतन्थर हटवाने के बाद इसकी जानकारी हुई है। रेलवे स्टेशन पर रुकते-रुकते ट्रेनों की गति केवल 15 किलोमीटर प्रति घंटा रह जाती है। हालांकि ट्रैक जर्जर है। लेकिन ट्रेन की गति कम होने के कारण ट्रैक से ट्रेन गुजरने में खतरा नहीं है।
उच्चाधिकारियों को सूचना दी है
स्टेशन अधीक्षक के मुताबिक जर्जर ट्रैक की सूचना आईओडब्ल्यू व एसएसई के साथ ही एडीईएन गजरौला को बहुुत पहले ही दी जा चुकी है। उच्चाधिकारियों का कहना है कि त्यौहारों की छुट्टियों के कारण मजदूर नहीं मिल रहे हैं। इसलिए ट्रैक को बदलवाया नहीं जा सका है। मजदूर मिलते ही ट्रैक को बदलवा दिया जाएगा।