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विरोध के चलते बंद दुकानों के खुलने से महिला मंडल की सदस्य फिर बिफरी, डीएम को सौपा ज्ञापन

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धामपुर (बिजनौर)। एसडीएम के अग्रिम आदेशों तक के लिए शराब की दोनों दुकानों को बंद करने के निर्देश देने के बाद भी मंगलवार को जैसे इनमें से एक दुकान के रोज की तरह से खुलने का महिला मंडल को पता लगा तो महिला सदस्यों ने मंगलवार को वहां पहुंच कर हंगामा किया। महिलाएं समाधान दिवस कार्यक्रम में पहुंच गई और प्रदर्शन कर डीएम को ज्ञापन सौंपा।
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नगर के भीतरी भाग में शराब की दो दुकानों को ऐसी जगह खुली है जहां दो महिला कालेज , श्री गांधी आश्रम का भंडार गृह , गांधी नेत्र चिकित्सालय और मंडप है। जिस दिन संबंधित लोगों ने इन दुकानों को खोला, यहां इन दुकानों को बंद कराने की मांग को लेकर उसी दिन से हंगामा चल रहा है। सोमवार क ो महिला मंडल समिति की प्रदेशाध्यक्ष सुमित्रा चौहान ने सदस्यों के बंद कराने की मांग को लेकर हंगामा किया था। आक्रोशित महिलाओं ने सोमवार को एसडीएम कार्यालय के बाहर जाकर प्रदर्शन किया और एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा था। एसडीएम ने इस दौरान आबकारी विभाग के अधिकारियों से बात करने के बाद समाधान करने का महिलाओं को भरोसा दिया था। एसडीएम ने यह भी आश्वास्त किया था कि जब तक समाधान नहीं होगा। दोनों में से कोई भी दुकान नहीं खुलेगी, लेकिन मंगलवार को एक दुकान रोज की तरह से खुलती मिलने पर महिलाएं एक बार फिर से गुस्सा गई। प्रदेशाध्यक्ष सुमित्रा देवी और जिला उपाध्यक्ष संतोष सैनी ने मौके पर पहुंच कर फिर से प्रदर्शन किया। इस मौके पर दुकान को बंद कराने पहुंचे आबकारी विभाग के निरीक्षक से भी महिलाओं की तीखी नोकझोंक हुई। महिलाओं ने इस दौरान समाधान दिवस कार्यक्रम में जाकर डीएम को ज्ञापन सौंपा। दुकानों को जनहित में यहां से न हटवाने पर आंदोलन को तेज करने और लखनऊ जाकर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को पूरे प्रकरण से अवगत कराने की बात कही ।

गिरफ्तारी की धमकी देने पर महिलाओं ने निरीक्षक को घेरा
जब आबकारी निरीक्षक मनोज कुमार ने दुकानों का विरोध करने वाली महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भिजवाने की धमकी दी तो आक्रोशित हो गए। महिलाओं ने निरीक्षक को घेर लिया और जमकर खरी खोटी सुनाई।
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राजस्व जमा होने पर , फिर कुछ नहीं होता : आबकारी निरीक्षक
आबकारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने कहा कि जब सरकार को इन दुकानों को संचालित कराने के बदले राजस्व चला गया तो अब इसमें विभाग कुछ नहीं कर सकता। अब ऐसे में इन दुकानों को चलवाने का जिम्मेदारी विभाग पर है। छात्राओं के स्कूल, कालेजों के निकट होने की बात, वह मानक अनुरूप दूरी पर है।
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