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चीनी के दामों में भारी गिरावट

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बिजनौर। गन्ने की बंपर पैदावार और रिकवरी ने चीनी मिलों को मुश्किल में डाल दिया है। चीनी का उत्पादन बढ़ने से चीनी के दाम धड़ाम हो गए हैं। चीनी के दाम में काफी कमी आ गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के शीरे को डिस्टलरी प्लांट को बेचने पर रोक लगाने से भी चीनी मिलों को घाटा हो रहा है।
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ट्रैंच विधि से अर्ली प्रजाति का गन्ना बोकर उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हो गई है। गन्ने का उत्पादन बढ़ने से किसानों को फायदा हुआ है। आमतौर पर जहां पहले किसानों के खेत से 40 से 50 क्विंटल प्रति बीघा की औसत से गन्ना निकलता था, अब गन्ने की पैदावार 80 क्विंटल प्रति बीघा तक जा पहुंची है। गन्ने से चीनी की रिकवरी भी आठ से बढ़कर 12 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पिछले साल पेराई सत्र के दौरान भी चीनी के दाम कम नहीं हुए थे, लेकिन इस साल पेराई सत्र के दौरान चीनी के दामों में कमी आ गई है। पिछले साल दिसंबर तक मिलों ने 4 करोड़ 19 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 11.44 लाख चीनी की बोरी बनाई थी। इस पेराई सत्र में चार करोड़ 42 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 11.55 लाख चीनी की बोरी बनाई जा चुकी हैं। चीनी के दाम कुछ दिन पहले तक 3850 रुपये प्रति क्विंटल तक थे, जो अब घटकर 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गए हैं। इसे अलावा प्रति क्विंटल गन्ने से चार प्रतिशत शीरा निकलता है। मिलें इसे डिस्टलरी प्लांट को बेचती हैं। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने पर्यावरण से जुड़े मामलों के कारण शीरे को डिस्टलरी प्लांट को बेचने पर रोक लगा दी है। पिछले साल शीरे के दाम 350 रुपये प्रति क्विंटल तक थे। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की रोक के बाद शीरे के दाम घटकर 50 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गए हैं।
बिजनौर शुगर मिल के प्रशासनिक अधिकारी एके सिंह के मुताबिक चीनी के दाम उत्पादन बढ़ने के कारण घटे हैं। मिल प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रख रहा है। चीनी के दाम गिरने से वित्तीय संकट सामने आ रहे हैं। किसानों का भुगतान समय से किया जा रहा है।
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