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धर्म प्रचारक ज्ञानी सुरजीत सिंह ने किए प्रवचन

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नजीबाबाद (बिजनौर)। गुरुद्वारा नानकशाही में आयोजित विशेष दीवान में कथा प्रवचन करते हुए ज्ञानी सुरजीत सिंह ने कहा कि सिख को बीत चुके कल और आने वाले कल की चिंता छोड़ वर्तमान में जीना सीखना होगा।
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इंग्लैंड से आए धर्म प्रचारक ज्ञानी सुरजीत सिंह ने यह बात कही। मन तू जोत स्वरूप है अपना मुल पछान... गुरुबाणी का उच्चारण करते हुए उन्होंने कहा कि मानव शरीर अमूल्य तो है, मगर तब तक जब तक उसमें श्वांस है। श्वांस समाप्त हो जाने पर मानव शरीर का कोई मोल नहीं। उन्होंने कहा कि परमात्मा को जीवित रहते ही पाया जा सकता है, मरने के बाद तो सब कुछ व्यर्थ है। ज्ञानी सुरजीत सिंह ने कहा कि गुरुनानक ने भूखों को भोजन खिलाकर समाज में एकरूपता लाने, सीमित संसाधनों में भी समाज के हर एक व्यक्ति को सुखी और समृद्ध बनाने की परंपरा शुरू की थी। गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के प्रधान नरेंद्र सिंह, सचिव हरेंद्र सिंह, हरभजन सिंह, जसवीर सिंह, एसपी सिंह ने ज्ञानी सुरजीत सिंह व उनके जत्थे को सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया। अनंद साहिब के पाठ, अरदास और हुकुमनामे से कार्यक्रम के समापन लंगर प्रसाद वरताया गया।
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