बिजनौर। लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने कमर कस ली है। भाजपा बूथों पर डेढ़ लाख कार्यकर्ताओं की फौज के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। इसके अलावा मतदाता सूची के लिए अर्द्धपन्ना प्रमुख भी बनाए जाएंगे। बूथों पर बनने वाले कार्यकर्ताओं में एससी/एसीटी व ओबीसी वर्ग के लिए भी कोटा निर्धारित किया गया है।
2014 के लोकसभा में भाजपा ने विरोधियों को पानी पिलाते हुए दोनों लोकसभा सीट पर कब्जा किया था। मुरादाबाद लोकसभा सीट मेें शामिल एक विधानसभा बढ़ापुर भी बिजनौर का ही हिस्सा है। वहां भी चुनाव में कमल खिला था। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने जिले की आठ विधानसभा सीटों में से छह पर कब्जा किया था। अब लोकसभा चुनाव लगभग सिर पर है तो सभी राजनीतिक पार्टियां सक्रिय हो गई हैं। भाजपा भी चुनाव की तैयारियों में जुट गई है। भाजपा ने हर बूथ पर 50 सदस्य बनाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। हर बूथ पर भाजपा के दस सदस्य जनता को पार्टी से जोड़ेंगे। इसमें अनिवार्य रूप से ओबीसी व एससीएसटी वर्ग के सदस्य भी शामिल होंगे। बाकी कार्यकर्ता दूसरे वर्गों से होंगे। जिले में 2994 बूथ हैं। इन पर पहले कार्यकर्ताओं की संख्या निर्धारित नहीं होती थी। भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव सिसौदिया के अनुसार पार्टी हर चुनाव को बहुत गंभीरता से लेती है। हर बूथ पर कम से 50 सदस्य बनाए जाएंगे। पार्टी सबका साथ सबका विकास की नीति पर काम करती है। जनता फिर से भाजपा के साथ जुड़ेगी और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे।
तीन जनपदों से जुड़ी बिजनौर की राजनीति
बिजनौर जिले से तीन जनपदों मेरठ, मुजफ्फरनगर और मुरादाबाद की लोकसभा सीट जुड़ी हैं। बिजनौर लोकसभा सीट में बिजनौर, चांदपुर विधानसभा के अलावा मीरापुर, हस्तिनापुर, पुरकाजी सीट शामिल हैं। हस्तिनापुर मेरठ, पुरकाजी व मीरापुर मुजफ्फरनगर जिले की विधानसभा हैं। नगीना लोकसभा सीट में पांचों विधानसभा क्षेत्र नगीना, नहटौर, नजीबाबाद, धामपुर व बढ़ापुर बिजनौर की ही हैं। मुरादाबाद लोकसभा सीट में एक एक विधानसभा सीट बढ़ापुर बिजनौर का ही क्षेत्र है। जिले की लोकसभा सीटें तीन कमिश्नरी मुरादाबाद, मेरठ व सहारनपुर से जुड़ी हैं। 2013 में मुजफ्फरनगर के कवाल कांड वाला क्षेत्र भी बिजनौर लोकसभा सीट में आता है। 2016 में पेद्दा कांड भी बिजनौर में ही हुआ था। इसलिए बिजनौर जिला भाजपा के लिए बहुत महत्वपूर्ण बन गया है।
अर्द्ध पन्ना प्रमुख को जिम्मेदारी
हर बूथ की एक वोटर लिस्ट बनती है। एक पन्ने पर 50 नाम तक रहते हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने हर पन्ने के लिए एक पन्ना प्रमुख नियुक्त किया था। पन्ना प्रमुख को सभी वोटरों के वोट डलवाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस बार अर्द्धपन्ना प्रमुख बनाया गया है। यानि एक पेज पर दर्ज 50 वोटरों के वोट डलवाने की जिम्मेदारी दस कार्यकर्ताओं पर रहेगी।