भागूवाला/नजीबाबाद। पहाड़ों और मैदानी क्षेत्र में भारी बारिश से बरसाती नदियां उफान पर हैं। कोटावाली नदी के उफान में किसानों की करीब 70 बीघा कृषि भूमि का कटान होने से किसान चिंतित हैं। नदी लगातार कटान करते हुए रामपुर चाठा की ओर बढ़ रही है। प्रशासन द्वारा तटबंध न बनाए जाने से गांव में बाढ़ आने के डर से लोग भयभीत हैं।
भागूवाला क्षेत्र के गांव रामपुर चाठा के अधिकांश ग्रामीणों का जीवन कृषि पर आधारित है। कोटावाली नदी के काफी समीप बसे रामपुर चाठा के लोगों को बरसात में हर साल नदी के उफान से होने वाले कटान और फसलों की बर्बादी का दंश झेलना पड़ता है। पिछले काफी दिनों से पहाड़ी और मैैदानी क्षेत्र में रुक-रुक के हो रही तेज बारिश में कई बार कोटावाली नदी अपने उफान में किसानों की कई बीघा जमीन लील चुकी है। शुक्रवार-शनिवार को कोटावाली नदी में आए उफान ने एक बार फिर किसानों की नींद उड़ा दी। अब तक नदी के उफान में किसानों कलवा सिंह, पवन कुमार, अशोक कुमार, मदन सिंह, दलवीर, हितेश कुमार, सुमेर, सुनील की करीब 70 बीघा जमीन नदी में समां चुकी है। कृषि भूमि और खड़ी गन्ने की फसल बर्बाद होने से किसानों की आर्थिक और मानसिक संकट झेलना पड़ रहा है। इतना ही नहीं किसानों से ठेके पर कृषि भूमि लेकर खेती करने वाले मजदूरों ऋषिराम, धनीराम, मोहन, चरण, रामदास, केलो, सीताराम की फसल नष्ट होने से मजदूरों के सामने रोटी और कर्ज का संकट खड़ा हो गया है।
गांव से सौ मीटर की दूरी पर बह रही नदी
कोटावाली नदी उफान के साथ कृषि भूमि का कटान करते हुए गांव की ओर बढ़ने से ग्रामीणों के सामने दोहरा संकट उत्पन्न हो गया है। नदी लगातार कटान करते हुए गांव से 100 मीटर की दूरी पर है। नदी के गांव के करीब आने पर ग्रामीणों में शासन और प्रशासन के प्रति आक्रोश है। ग्रामीणों टीकाराम भारत सिंह, सुभाष, सोमदत्त, सत्यपाल का कहना है कि कृषि भूमि और गांव को बचाने के लिए नदी क्षेत्र में तटबंध बनाने की कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधि से मांग की। बरसात में कटान का निरीक्षण करने प्रशासन और जनप्रतिनिधि तो हर बार आते हैं। नदी क्षेत्र में तटबंध शीघ्र बनाए जाने के आश्वासन पर आश्वासन तो देते हैं लेकिन बरसात जाते ही उनके वादे भी काफूर हो जाते हैैं। लेेखपाल फूल सिंह का कहना है कि नदी के उफान में जो किसानों की भूमि का कटान हुए हैं उसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। हाल ही में हुए कटान की रिपोर्ट भी भेजी जा रही है।