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गन्ने की रिकॉर्ड पेराई

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बिजनौर। जिले के किसानों ने गन्ना उत्पादन में रिकॉर्ड बना दिया है। जिले में दस करोड़ क्विंटल गन्ने की शुगर मिलों में पेराई हो चुकी है। यूपी के लखीमपुर खीरी जिले को छोड़कर किसी भी अन्य जिले में आज तक इतने गन्ने की पेराई नहीं हुई है। अभी भी खेतों में कुछ गन्ना खड़ा है। गन्ना उत्पादन के साथ साथ किसानों की आय में भी जबरदस्त उछाल आया है। बीते दस साल में किसानों की गन्ने से आमदनी पांच गुनी से भी अधिक हो गई है। तकनीक के साथ खेती करना, उन्नत बीजों को अपनाना और सही समय पर फसल बोना। खेती में आमदनी बढ़ानी है तो किसानों को इन तीनों नियमों का पालन करना होता है। जिले के किसानों ने इन तीनों नियमों को अपनाया और परिणाम सामने है। जिले में पांच साल पहले तक केवल 22 प्रतिशत जमीन में ही अर्ली प्रजाति का गन्ना बोया जाता था। किसानों ने एक क्रांति के तहत अर्ली प्रजाति को अपनाया और इसका रकबा 90 प्रतिशत से ऊपर किया। ट्रैंच विधि से गन्ने की बुआई की और शरदकालीन गन्ने की बुआई पर भी जोर दिया। अर्ली प्रजाति का गन्ना सितंबर से नवंबर तक बोया जाता है। इस गन्ने में कोई रोग भी नहीं आता। ट्रैंच विधि से बोए गए शरदकालीन गन्ने की पैदावार 100 क्विंटल प्रति बीघा से भी अधिक निकली। जहां पहले प्रति बीघा गन्ने का औसत उत्पादन 45 क्विंटल था, वह बढ़कर 75 क्विंटल तक पहुंच गया। बंपर उत्पादन और अच्छी कीमत मिलने से जिले के किसानों की आमदनी भी बंपर हुई है। जिला गन्ना अधिकारी ओपी सिंह के मुताबिक जिले के किसान पूरे देश के लिए मॉडल हैं। किसानों ने तकनीक, उन्नत बीज को अपनाकर अपनी आमदनी को पांच गुनी करके दिखा दिया है। गन्ना किसानों के लिए अब लाभ की फसल बन गई है।
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सुखद परिणाम आए सामने
पिछले दस सालों में किसानों ने गन्ने की खेती में पूरे जोर लगाए। इसके सुखद परिणाम भी सामने आए हैं। किसानों ने गन्ने का उत्पादन दोगुने से भी अधिक कर लिया है। वहीं किसान की गन्ने से होने वाली आमदनी पांच गुनी से भी अधिक हो गई है। 2008-09 में किसानों ने 639 करोड़ रुपये का गन्ना बेचा था, इस साल अब तक किसान 3300 करोड़ रुपये का गन्ना बेच चुके हैं।


साल गन्ना चीनी कीमत
2008-09 461 44 639
2009-10 619 60 1473
2010-11 611 60 1248
2011-12 699 66 1669
2012-13 765 75 2119
2013-14 663 64 1843
2014-15 794 82 2218
2015-16 746 84 2100
2016-17 891 104 2761
2017-18 1003 118 3300
नोट:आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं। गन्ना करोड़ क्विंटल व चीनी लाख क्विंटल में है। स
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बिलाई शुगर मिल का पेराई सत्र पूरा
22 लाख क्विंटल गत वर्ष की तुलना में अधिक हुई पेराई
हल्दौर। बिलाई शुगर मिल को पेराई के लिए पर्याप्त मात्रा में गन्ना न मिलने पर बंद कर दिया गया। मिल ने गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 22 लाख क्विंटल गन्ने की अधिक पेराई की है।
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बिलाई शुगर मिल में गत कई दिनों से नो केन की स्थिति बनी हुई थी। मिल को पेराई के लिए पर्याप्त मात्रा में गन्ना न मिलने से इसे रोक- रोक कर चलाया जा रहा था। गन्ना न मिलने पर शनिवार की सुबह करीब नौ बजे मिल को बंद कर दिया गया। मिल के जीस्त्रत्त्एम केन सिताब सिंह ने बताया कि गत वर्ष मिल में एक करोड़ आठ लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी। मिल ने गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष करीब 22 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई अधिक की है। गन्ने से रिकॉर्ड तोड़ रिकवरी मिलने से चीनी का बढ़िया उत्पादन हुआ है। करीब छह माह पूर्व चीनी चार हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी। लेकिन फिर चीनी के दाम गिरने लगे। वर्तमान में चीनी 2700 से 2800 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। शीरे के दामों में भारी गिरावट है। साथ ही खाद में प्रयुक्त किए जाने वाली मैली व शीरे के पानी के दाम भी कम है। मिल अधिकारियों की मानें तो मिल चीनी व अन्य उत्पादों में भारी मंदी आने के कारण आर्थिक तंगी सो जूझ रही है। मिल ने अपने क्षेत्र की हल्दौर गन्ना समिति में 22 जनवरी व धामपुर, बिजनौर और चांद पुर समिति का 15 जनवरी तक का गन्ना भुगतान किया है। मिल आर्थिक तंगी के कारण करीब तीन माह से किसानों के गन्ने का भुगतान रोक रखा है। मिल की चीनी बिक्री कम होने से किसानों के बकाया गन्ने का भुगतान न हो सका, और मिल कर्ज में डूबी हुई है। उधर भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने किसानों के गन्ने का बकाया भुगतान शीघ्र न होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दे रखी है।
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