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ढबरासी में तड़प तड़प कर दम तोड़ रहे बंदर, सौ की मौत

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ढबरासी (अमरोहा) । ढबरासी में मंगलवार को सात बंदरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बंदरों की मौत का यह सिलसिला पिछले एक सप्ताह से जारी है। अब तक करीब सौ बंदरों की मौत हो चुकी है। लोगों ने बंदरों को जहर देकर मारने की आशंका जताई है। पशु चिकित्सकों की टीम ने एक बंदर का पोस्टमार्टम किया। मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। वहीं विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए बरेली आईवीआरआई भेजा गया है।
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मंगलवार को सात बंदर ढबारसी के मोहल्ला होली वाला की गलियों में मरे मिले। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले सात आठ दिनों से लगातार बंदर मर रहे हैं। बंदरों की मौत कैसे हो रही है, यह लोगों की समझ से बाहर है। बताया कि खूनी दस्त के बाद बंदर तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैं। रोजाना दस से बारह बंदर मर जाते हैं। बंदरों की मौत से लोग हैरान हैं। वहीं उन्हें जहर देकर मारने की आशंका भी जताई जा रही है। बंदरों में आस्था रखने वाले लोगों में रोष फैला हुआ है। इन्होंने जहर देकर मारने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। इसके साथ ही लोगों में दहशत भी बनी हुई हैं। ग्रामीण मान रहे हैं कि अगर बंदरों की मौत बीमारी से हो रही है तो कहीं यह बीमारी लोगों को अपनी चपेट में ना ले ले। प्रधान पति राजीव गोयल ने बताया कि गांव में अब तक करीब सौ बंदरों की मौत हो चुुकी है। उन्होंने प्रशासन से बंदरों की मौत की जांच कराने की मांग उठाई है। अगर किसी ने जहर दिया है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाए।

बंदरों का पेट मिला खाली
पोस्टमार्टम करने वाले डा. तेजपाल सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम में यह बात साबित हुई है कि बंदर का पेट खाली था। यानि मरने से दो तीन दिन पहले से बंदर ने कुछ खाया नहीं था। बंदर के फेफड़े और लीवर भी खराब मिला है। खूनी दस्त से बंदरों की मौत हो रही है। जहर देने की पुष्टि लैब में जांच के बाद ही हो सकेगी। गांव में उनके सामने दो बंदरों की मौत हुई। जबकि दो बेहोशी की हालत में पड़े थे।
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बाग कटा तो आबादी में रहने लगे बंदर
ढबारसी में बंदरों की काफी तादात है। लोगों ने बताया कि जहां आज बंदर रहते हैं। यहां कभी बाग हुआ करता था। करीब 25 साल पहले अंधेरी बाग में बंदरों का ठिकाना था। बाग के कटने के बाद बंदर आबादी में रहने लगे। खैर यह बात अलग है कि इनके उत्पात के चलते लोग परेशान भी थे लेकिन, अचानक बंदरों की मौत से ग्रामीण सकते में आ गए हैं।

बंदरों की मौत पर टीम गठित करते हुए पोस्टमार्टम कराया गया है। बिसरा जांच के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा गया है। जिससे बंदरों की मौत का सच सामने आ सके। वहीं बीमार बंदरों के इलाज को निर्देश दिए गए हैं। - डा. ब्रजवीर सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

बंदरों की मौत से वन विभाग अनजान :
ढबरासी में पिछले एक सप्ताह से बंदरों की लगातार मौत हो रही है। यहां एक या दो बंदरों की मौत होती तो मामला सामान्य लगता, लेकिन अब तक सौ बंदरों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी वन विभाग अनजान बना हुआ है। डीएफओ रमेशचंद से बात करने की कोशिश की गई तो उनका नंबर बंद आया। वहीं एसडीओ एके सिंह ने कहा कि उन्हें बंदरों की मौत के बारे में नहीं पता है। कहा कि शायद रेंजर को जानकारी होगी। उन्होंने बताया कि जानकारी कर कार्रवाई करेंगे। अब सवाल यह उठता है कि वन और वन्य जीवों के प्रति विभाग का रवैया कैसा है। ढबारसी में बंदर दम तोड़ रहे हैं और वन विभाग की नींद नहीं टूटी है।
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