बिजनौर। नूरपुर के विधायक लोकेंद्र चौहान में युवा अवस्था से ही राजनीति का जुनून भरा था। युवा अवस्था से ही वे जिले की राजनीति पर छाए रहे। लोकेंद्र चौहान का सपना शुरू से ही जिले की राजनीति में चमकने का था और उन्होंने यह मुकाम हासिल भी किया। लोकेेंद्र चौहान जिले की राजनीति में हिंदुत्व का बड़ा चेहरा बन गए थे। हिंदुत्व के मुद्दे पर छोटी हो या बड़ी लड़ाई, वह कभी पीछे नहीं हटे और हर लड़ाई में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
लोकेंद्र चौहान राजनीति में उनके बढ़ रहे वजूद को देखकर भाजपा के कई दिग्गज नेताओं की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने पहचान लिया कि एक दिन यह युवा चेहरा जिले की राजनीति में परचम लहराएगा। भाजपा के वर्तमान प्रदेश मंत्री अशोक कटारिया वर्ष 2000 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री थे। उनकी नजर लोकेंद्र चौहान पर पड़ी। उन्होंने लोकेंद्र चौहान को भाजपा की राजनीति में सक्रिय किया और 2000 में लोकेंद्र चौहान को भारतीय जनता युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाया। इसके बाद लोकेेंद्र चौहान ने राजनीति में पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2004 से 2007 तक लोकेंद्र चौहान भाजपा के जिला महामंत्री रहे। 2007 में धामपुर सीट से वे पहली बार भाजपा के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़े। इस चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। 2009 में लोकेंद्र चौहान को भाजपा का जिलाध्यक्ष बना दिया गया। जिलाध्यक्ष रहते हुए 2012 में उन्हें नूरपुर विधानसभा से भाजपा ने टिकट दे दिया। लोकेंद्र चौहान पहली मर्तबा विधायक बने और जिले की राजनीति पर पूरी तरह छा गए। 2017 के विधानसभा चुनाव में मोदी की लहर में वे दूसरी बार विधायक बने। लोकेंद्र चौहान जिले में भाजपा की राजनीति में हिंदुत्व का बड़ा चेहरा बन गए थे। कई बार हिंदुत्व की लड़ाई में उन्होंने धरने-प्रदर्शन किए। सपा सरकार के दौरान विधायक रहते उन्होंने सपा के राज में भी हिंदुत्व की लड़ाई में इंसाफ दिलाया। नूरपुर में रोका गया रामडोल का जुलूस उनके प्रयास से ही निकल पाया था। जुलूस निकलने के बाद जिले की राजनीति पर वह पूरी तरह चमक गए थे।