दो दर्जन ग्राम पंचायत सचिव ऑडिट में फंसे
बिजनौर। जिले के ग्राम पंचायत सचिव से संकट के बादल छटने का नाम नहीं ले रहे हैं। नारायणपुर रतन के ग्राम पंचायत सचिव पर गबन के मामले में कार्रवाई होने के बाद अब दर्जनों ग्राम पंचायत सचिव ऑडिट के मामले में फंस गए हैं। विधान सभा समिति ने इन ग्राम पंचायत सचिव के प्रकरण तलब किए हैं। डीपीआरओ ने पंचायत सचिव का जवाब तलब किया है।
जिले में 1128 ग्राम पंचायत हैं, जिनमें जिला, मंडल, राज्य मुख्यालय की टीम द्वारा ऑडिट किया जाता है। ग्राम पंचायत का हर साल ऑडिट होना जरूरी है। ग्राम पंचायत के अभिलेख पंचायत सचिव के पास होते हैं। ऑडिट कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सचिव की होती है। शासन के निर्देशों के बाद भी ग्राम पंचायत पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने तक भी अभिलेखों का ऑडिट नहीं कराती हैं। पंचायतराज विभाग के निर्देशों का धड़ल्ले से मजाक बनाया जाता है। सूबे में ग्राम पंचायतों के अभिलेखों को आनलाइन अपलोड कराने का निर्णय लिया है। डीपीआरओ मनीष कुमार के अनुसार जिले की 18-20 ग्राम पंचायतों ने अभिलेखों का ऑडिट नहीं कराया है। इन ग्राम पंचायत के सचिव को नोटिस जारी कर दिया गया है। अन्य ग्राम पंचायतों के ऑडिट में भी कई आपत्तियां मिली हैं। अब इन सभी आपत्तियों को लखनऊ में 12 दिसंबर को होने वाली विधान सभा समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। विशेष ऑडिट टीम वहां आपत्तियों की बिंदुवार समीक्षा करेगी। समीक्षा विधान सभा समिति की निगरानी में होगी।
ऑडिट मामले में प्रधानों पर गिर सकती है गाज
बिजनौर। डीपीआरओ दफ्तर के सूत्रों के अनुसार अभिलेखों का ऑडिट नहीं कराने के मामले में सचिव के साथ ग्राम प्रधानों पर भी गाज गिर सकती है। यदि मामले पिछले कार्यकाल के हैं तो भी तत्कालीन प्रधानों पर कार्रवाई होगी। कार्रवाई के डर से ग्राम प्रधान सचिवों के घरों के चक्कर लगा रहे हैं। प्रधानों को कार्रवाई होने का डर सता रहा है।