बिजनौर। जिला कृषि रक्षा विभाग देरी से बोई जाने वाली गेहूं की प्रजातियों से ज्यादा पैदावार लेने के लिए भूमि के शोधन के लिए गांव गांव जाकर किसानों को टिप्स दे रहा है। किसानों को खरपतवार नाशक दवाइयां अनुदान पर मिल रही है। किसानों से योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी विकास कुमार के अनुसार गेहूं की बुवाई 15 दिसंबर तक होती है, परंतु जिले में लेट प्रजाति के गेहूं की बुवाई 15 जनवरी तक होती है। किसान गन्ने की फसल काटकर गेहूं बोता है। गन्ना काटने के बाद जमीन से हानिकारक कीड़े मकोड़े निकल आते है। यदि बिना भूमि का शोधन किए गेहूं की बुवाई जमीन कर दी जाती है तो पैदावार कम होती है। कीड़े मकोड़े दोबारा जमीन में घुसकर नई फसल पर असर डालते हैं, इसलिए लेट प्रजाति के बीजों से गेहूं की अच्छी पैदावार लेने के लिए भूमि का शोधन जरूरी है। किसान गेहूं में खरपतवार पैदा नहीं होने दें। इसके लिए खरपतवार नाशक दवाइयों का इस्तेमाल समय से करें। खरपतवार नाशक दवाइयां का प्रयोग फसल बोने के 30-35 दिन बाद आवश्यक रूप से करें। खरपतवार नाशक दवाइयां जिले की कृषि रक्षा इकाइयों पर 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध हैं।