बैंक उपभोक्ताओं से फोन पर नहीं मांगता खाते की जानकारी
बिजनौर। बैंक के कर्मचारी उपभोक्ताओं से कभी भी खाते या उपभोक्ता की जानकारी फोन पर नहीं मांगते हैं। मैसेज के अलावा प्राइवेट बैंक वाले कर्मचारी उपभोक्ताओं से संबंधित प्रपत्र की फोटो कॉपी साइन के साथ बैंक में लाकर जमा करने के लिए कहते हैं। उपभोक्ताओं को फोन पर अपने खाते, पिन या आधार नंबर की जानकारी किसी को नहीं देनी चाहिए।
उपभोक्ताओं को फोन कर खुद को बैंक कर्मचारी बताने वाले उनसे एटीएम का 16 नंबर का डिजिट, पिन नंबर पूछ लेते हैं। फोन करने वाले ये लोग उपभोक्ताओं के खाते से रुपये निकाल लेते हैं या फिर ऑन लाइन शॉपिंग करके उपभोक्ताओं के खाते से रुपये कटवाते हैं। यह एक तरह का साइबर क्राइम है और इस तरह की गैंग के सदस्य पुलिस की पकड़ से दूर ही रहते हैं। अब साइबर क्राइम के सदस्य उपभोक्ताओं का आधार नंबर बचत खाते से लिंक करने के नाम पर फोन करके खाते के बारे में जानकारी लेकर उपभोक्ताओं के खातों से रुपये उड़ा रहे हैं, जबकि बैंक उपभोक्ताओं से खाते के बारे में कोई भी जानकारी फोन पर नहीं मांगता है। बैंक उपभोक्ताओं को मैसेज कर जरूरी दस्तावेज शाखा में जमा करने को कहता है। हालांकि कुछ प्राइवेट बैंकों के कर्मचारी उपभोक्ताओं को फोन करते हैं, लेकिन ये भी केवल दस्तावेज जमा करने के लिए ही कहते हैं।
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अजय कुमार के अनुसार उपभोक्ता बैंक खाते की जानकारी फोन पर किसी को भी न दे। बैंक कर्मचारी ऐसी सूचना फोन पर नहीं मांगते हैं। अगर कोई फोन पर सूचना मांगता है तो उपभोक्ता बैंक शाखा में जाकर बात करें।
दूरदराज आती है नंबर की लोकेशन
साइबर अपराधियों को जो फोन किए जाते हैं, उन मोबाइल नंबर की लोकेशन हरियाणा, झारखंड, आसाम आदि से आती है। पुलिस उतनी दूर कार्रवाई करने नहीं जाती और साइबर अपराधियों का शिकार हुए बैंक उपभोक्ताओं को टरका देती है।