बिजनौर। लेट होते पेराई सत्र में गेहूं की फसल का उत्पादन बनाए रखने के लिए कृषि विभाग इस बार पछेती प्रजाति के गेहूं के बीज किसानों को देगा। इस बीज को लेट बोने पर भी किसान को अच्छा उत्पादन प्राप्त होगा। ये बीज पहली बार लाए गए हैं। कृषि विभाग की दुकानों पर अनुदान पर ये बीज उपलब्ध होंगे। कृषि विभाग किसानों को इन बीजों के बारे में बता रहा है।
गन्ने के बाद गेहूं जिले के किसानों की प्रमुख फसल है। जिले में हर साल डेढ़ लाख हेक्टेअर से भी ज्यादा गेहूं बोया जाता है। किसान अधिकतर रकबे में गन्ना खाली कर गेहूं बोते हैं। चीनी मिलों की हठधर्मिता से इस बार का पेराई सीजन पहले ही बहुत लेट हो गया है। पेराई सीजन लेट होने से गेहूं की फसल की बुआई लेट होना तय है। बुआई लेट होने से इसका उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ेगा। इसे ध्यान में रखकर इस बार कृषि विभाग ने लेट बोई जाने वाली प्रजाति के बीज मंगवाए हैं। किसानों को पहली बार डब्ल्यूएच 1124, डब्ल्यूएच 90, एचडी 3086 की प्रजाति के बीज दिए जाएंगे। इसके अलावा डब्ल्यूएच 88, डब्ल्यूएच 1105, एचडी 2967 तथा पीवीडब्ल्यू 590 बीज भी किसानों को दिए जाएंगे। गेहूं एक नवंबर से 25 दिसंबर तक बोया जाता है। आमतौर पर एक बीघे में तीन से साढ़े चार क्विंटल गेहूं निकलता है। गेहूं बुआई में लेट होने पर उत्पादन गिर जाता है। पछेती प्रजाति का बीज बोने से उत्पादन में कोई गिरावट नहीं होगी। किसानों को गेहूं का बीज 3280 से 3540 रुपये प्रति क्विंटल पर दिया जाएगा। बीज पर 60 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी।