अच्छे सत्संग से सुमति संभव : चैतन्यपुरी महाराज
धामपुर। हरि चैतन्यपुरी महाराज ने कहा कि सुख- दुख, हानि -लाभ, जीवन- मरण और यश- अपयश आदि परिस्थितियां आती जाती रहती है। संसार, परिस्थितियां , प्राणी , पदार्थ सभी परिवर्तन शील है। परंतु विचार शील प्राणी कभी भी किसी भी स्थिति में धर्म व परमात्मा का साथ कभी नहीं छोड़ता है। मंगलवार को शुगर मिल में पंडित जय प्रकाश शर्मा के आवास प्रवचन करते हुए महाराज ने कहा कि धैर्य , धर्म , मित्र व नारी इन चारों की परीक्षा की विपत्ति के समय होती है। सुमति , कुमति हर प्राणी के अंदर होती है। कब , कौन सी बुद्धि पर सवार हो जाए, कुछ नहीं कह सकते। हर अच्छे संग से सुमति, बुरी संगत से कुमति उत्पन्न होती है। स्वामी ने कहा कि बाहरी जगत से सूर्य, चंद्र आदि प्रकाश करते है। परंतु अंत: जीवन में संत वाणी प्रकाश करती है। हम सत्संग के प्रकाश से राग, द्वेष, ईर्ष्या और विकारों को दूर कर अपने मन मस्तिष्क की सफाई करें। महाराज ने बताया कि 25 से 30 मई तक ताशकंद में धर्म सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। 27 मई को प्रदेश सरकार की ओर से महाराज जी को इंटरनेशनल एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में डा. एनपी सिंह, राजेंद्र अरोड़ा, जय प्रकाश शर्मा, योगेंद्र शर्मा एड., संजीव कुमार, विजय शर्मा, मनोज कात्यायन, गोपाल शर्मा, विकास शर्मा, मास्टर चरन दास शर्मा, विजय छाबड़ा, रेखा कात्यायन, उमा शर्मा, पुष्पलता , मोनिका रानी, गीता शर्मा रही।