मायावती सरकार में चड्ढा ग्रुप को फायदा पहुंचाने के लिए खेला गया था खेल
बिजनौर। मायावती सरकार के दौरान बिजनौर व चांदपुर की शुगर मिल चड्ढा ग्रुप को कौड़ियों के दाम में बेच दी गई थी। दोनों मिलों को बेचने से खूब शोर मचा था। सुप्रीम कोर्ट के मायावती सरकार में बेची गई शुगर मिलों की बिक्री पर रोक लगाने से मिल के खरीदारों में खलबली मची हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मायावती सरकार के दौरान वर्ष 2009-10 में बेची गई जिन शुगर मिलो की बिक्री पर रोक लगाई है उनमें बिजनौर व धामपुर की शुगर मिल भी शामिल हैं। ये दोनों सरकारी मिल थी। किसान इन मिलों को चड्ढा ग्रुप को बेचने के विरोध में लामबंद हो गए थे। किसानों ने कई बार आंदोलन भी किए पर उनकी एक नहीं सुनी गई। आननफानन में दोनों चीनी मिलों को कौड़ियों के दाम में बेच दिया गया। बिजनौर शुगर मिल को छह अक्तूबर 2010 में 50 करोड़ 60 लाख रुपये और चांदपुर शुगर मिल को 80 करोड़ 50 लाख रुपये में सितंबर 2010 में चड्ढा ग्रुप को बेच दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक बिजनौर शुगर मिल 40 एकड़ व चांदपुर शुगर मिल 80 एकड़ जमीन में बनी हुई है। बिजनौर शुगर मिल की अनुमानित लागत ढाई सौ करोड़ और चांदपुर शुगर मिल की अनुमानित लागत 300 करोड़ है। सरकार ने चड्ढा ग्रुप को फायदा पहुंचाने के लिए मिलों को बेचने का यह खेल खेला था। जिन दामों में शुगर मिल बेची गई उनसे ज्यादा दामों की तो दोनों की जमीन ही है।
सुप्रीम कोर्ट के मायावती सरकार में बेची शुगर मिलों की बिक्री पर रोक लगाने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। विनीत कुमार, हरपाल सिंह के मुताबिक किसानों का आरोप है कि चड्ढा ग्रुप के हाथों में जिले की दोनों मिल जाने से चड्ढा ग्रुप की मनमानी रहती थी। यह ग्रुप अपनी मर्जी से मिल चलाता व बंद करता था। मिल के फिर से सरकार के हाथों में जाने से किसानों का फायदा होगा।
बिजनौर मिल की जमीन में चड्ढा ग्रुप काटना चाहता था कॉलोनी
मायावती सरकार में बिजनौर व चांदपुर शुगर मिल को खरीदने के बाद चड्ढा ग्रुप बिजनौर शुगर मिल के गन्ने को चांदपुर मिल में शिफ्ट करके बिजनौर शुगर मिल की जमीन में कॉलोनी काटने का इरादा था, पर किसानों के विरोध के चलते चड्ढा ग्रुप ये काम नहीं कर सका।
चड्ढा ग्रुप की नजर शुरू से ही बिजनौर शुगर मिल की जमीन पर थी। चड्ढा ग्रुप को मालूम था कि शुगर मिल की जमीन बेशकीमती है। चीनी मिल अब शहर के बीच आ गई है। जमीन में कॉलोनी काटने से मोटी रकम की कमाई होगी। बिजनौर व चांदपुर शुगर मिल खरीदने के बाद ग्रुप का इरादा बिजनौर शुगर मिल का गन्ना चांदपुर शुगर मिल में शिफ्ट करने का था। इसके बाद वह बिजनौर की मिल की जगह कॉलोनी काटने का इरादा बना लिया। इसकी भनक किसानों को लग गई। किसान इसके विरोध में सड़कों पर उतर आए तब जाकर चड्ढा ग्रुप को बिजनौर मिल की जमीन में कॉलोनी काटने का सपना चौपट हो पाया। मिल प्रबंधन ने कई बार ब्रेक डाउन दिखाकर गन्ना शिफ्ट करने का प्रयास हुआ लेकिन किसानों की एकजुटता के कारण ऐसा संभव न हो सका।