शिक्षिका गैरहाजिर मिली, प्रधान को नोटिस
बिजनौर। सीडीओ इंद्रमणि त्रिपाठी को पूर्व माध्यमिक व प्राथमिक विद्यालय भरैरा के निरीक्षण में दो शिक्षिका तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी गैरहाजिर मिले। स्कूल में कक्षा आठ के बच्चे हिंदी के शब्द पढ़ और लिख नहीं सके। स्कूल के कमरों में कबाड़ भरा था। मिड डे मील स्तरीय नहीं था। बच्चों की ड्रेस घटिया थी। सीडीओ ने दोनों स्कूलों के सभी शिक्षकों का वेतन रोकने तथा ग्राम प्रधान को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय में इन्चार्ज सहायक अध्यापिका ज्योति सिंह, सहायक अध्यापिका रितु सिंह, नमिता चौधरी, शगुफ्ता शाहीन, विजय कुमार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं। इनके अतिरिक्त अंकुर, बीटीसी प्रशिक्षु भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। निरीक्षण में शगुफ्ता शाहीन सहायक अध्यापिका, विजय कुमार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। शगुफ्ता शाहीन के संबंध में बताया गया कि वे प्राथमिक विद्यालय बक्शीवाला से संबद्ध हैं। विद्यालय में पंजीकृत 57 छात्रों में 32 छात्र उपस्थित पाए गये। कक्षा सात व आठ के बच्चों से गणित व सामान्य ज्ञान के कई प्रश्न पूछे गए। बच्चों से हिन्दी मेें युधिष्ठिर लिखने को कहा गया। बच्चे इस शब्द न तो पढ़ सके और न ही लिख सके।
सीडीओ के अनुसार प्रधानाध्यापिका व सहायक अध्यापिकाएं पढ़ाई में कोई रुचि नहीं ले रही हैं। इनका वेतन रोकने के निर्देश दिए गए हैं। मिड-डे-मील के लिए ग्राम प्रधान द्वारा सोयाबीन की बड़ी, टमाटर, अन्य हरी सब्जियां उपलब्ध नहीं कराने का मामला प्रकाश में आया। डीपीआरओ से प्रधान को नोटिस जारी करने की हिदायत दी गई है। निरीक्षण में विद्यालय परिसर व कक्षों में गंदगी का अम्बार मिला। केवल 10-12 बच्चे ही यूनिफार्म पहने हुए मिले। ड्रेस की गुणवत्ता ठीक नहीं थी। प्राथमिक विद्यालय में पारुल, मुख्य अध्यापिका, मीनाक्षी चौधरी, नीरू सहायक अध्यापिका, गीता रानी शिक्षा मित्र तैनात हैं। निरीक्षण के समय शिक्षामित्र गीता रानी अनुपस्थित पाईं गयी। पंजीकृत 51 में से केवल 27 छात्र उपस्थित पाए गए। प्राथमिक विद्यालय के तीन कक्षों की स्थिति अत्यधिक खराब मिली। छत से प्लास्टर गिर रहा था, इसके कारण बच्चें कक्षों में नहीं बैठ रहे। एक कक्ष में कवाड़ भरा मिला है। विद्यालय परिसर में घास उगी हुई है। बच्चों से मौखिक व लिखित प्रश्नों के संतोषजनक जवाब दिए। निरीक्षण में मिला कि सहायक अध्यापिका नीरु द्वारा बच्चों की पढ़ाई में परिश्रम किया जा रहा है, परंतु मुख्य अध्यापिका पारुल द्वारा इस संबंध में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मुख्य अध्यापिका पारुल का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोका गया है।