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चाय-समोसे में सिमटा आयरन व फोलिक एसिड का प्रशिक्षण

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चाय-समोसे में सिमटा प्रशिक्षण कार्यक्रम
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बिजनौर। वित्तीय वर्ष के अंत में स्वास्थ्य विभाग को आयरन एवं फोलिक एसिड संपूर्ण कार्यक्रम के तहत शिक्षकों का प्रशिक्षण देने की याद आ ही गई। आनन फानन में दिया जा रहा प्रशिक्षण चाय-समोसे तक सिमट कर रह गया है। प्रशिक्षण में दौरान पैड, पेन आदि सामग्री भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही। शिक्षकों ने मामले की जांच कराने की मांग की है।
परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्कूली बच्चों को प्रत्येक सप्ताह आयरन की गोलियां खिलाई जाती हैं। बच्चों को आयरन की गोली खिलाने का सिलसिला लंबे अर्से से चल रहा है। शिक्षक बताते हैं कि एक वर्ष से भी अधिक समय से बच्चों को आयरन की गोलियां खिलाई जा रही हैं। वित्तीय वर्ष का आखिरी महीना चल रहा है। अब स्वास्थ्य विभाग को स्कूली बच्चों को आयरन की गोली खिलाने के लिए शिक्षकों को दक्ष करने की याद आई। प्रशिक्षण स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को दिया जा रहा है। जिले में 2500 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को एक-एक समोसा और एक-एक प्याला चाय दी जा रही है। पैड, पेन व अन्य कोई सामग्री नहीं दी जा रही है।
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प्रशिक्षण ब्लॉक स्तर पर दिए जा रहे हैं। मंगलवार को बीआरसी जमालपुर पठानी में स्वास्थ्य विभाग की टीम से शिक्षकों ने प्रशिक्षण के बजट के बारे में पूछा तो स्वास्थ्य विभाग की टीम चुप्पी साध गई। शिक्षकों को कहना है कि वह लंबे अर्से से बच्चों को आयरन की गालियां खिला रहे हैं। आयरन एवं फोलिक एसिड संपूर्ण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी रोहिताश कुमार ने बताया कि एक बैच में करीब 50 से 60 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एक बैच के प्रशिक्षण के लिए सात हजार रुपये की धनराशि निर्धारित है। इसमें शिक्षकों को पेन, पैड आदि के अलावा नाश्ते की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रशिक्षण ब्लॉक स्तर पर दिया जा रहा है। यदि कहीं कोई गड़बड़ी है तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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शिक्षक बोले मामले की हो जांच
स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिक्षकों को दिए जा रहे प्रशिक्षण की शिक्षक संगठनों ने जांच की मांग की है। प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष अरविंद चौधरी, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष राहुल राठी ने बताया कि शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए आई धनराशि को स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मिलीभगत से खुर्द बुर्द किया जा रहा है। मामले की जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
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