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फसल चक्र अपनाने से किसानों को होगा अपेक्षित लाभ

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नींदडू़।
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राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत आयोजित ब्लाक स्तरीय कृषि गोष्ठी में मिट्टी की जांच, बीजोपचार, आवश्यकतानुसार उर्वरकों के प्रयोग के साथ फसल चक्र अपनाने पर जोर दिया गया।
बुधवार को मदीना मस्जिद के सामने गन्ना विकास परिषद धामपुर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत ब्लाक स्तरीय कृषि गोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए शिक्षाविद डॉ. ओपी मौर्या ने किसानों से गन्ना आपूर्ति वाले खेत से बीज लेकर उसका प्रयोग करने की बजाय गन्ना नर्सरी लगाकर स्वस्थ बीज हासिल करने की सलाह दी। अंधाधुंध यूरिया के प्रयोग की बजाय मिट्टी की जांच के बाद आवश्यक उर्वरकों का प्रयोग करने तथा समय पर बुआई करने, फसल चक्र के तहत गन्ने की फसल के बाद खेत में हरी खाद, मटर, बरसीम और चारा आदि उगाने की सलाह दी। वरिष्ठ गन्ना प्रबंधक ओमवीर सिंह ने कहा कि स्वस्थ फसल के लिए बीजोपचार बहुत जरूरी है। चूंकि गन्ने के उत्पादन में बीज का योगदान 30 प्रतिशत होता है, इसलिए उपचार के बाद बीज की बुवाई करें। मात्र 10 बीघा खर्च से फसल निरोग रहेगी। अन्य विकल्प होने तक 0238, 0118, कोजे-85 जैसी उन्नतशील प्रजातियों का चयन करें, बीज काटते समय गन्ने के खराब टुकड़ों का प्रयोग न करें।
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वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कमलेश कुमार ने वैज्ञानिक ढंग से खेती करने के तरीके सुझाए तथा पोक्का बोइंग रोग से सावधान रहने को कहा। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक देवेंद्र तिवारी ने बीज नर्सरी हेतु चीनी मिल द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी दी। अतिरिक्त गन्ना प्रबंधक मनोज चौहान ने हार्वेस्टर मशीन द्वारा गन्ना कटाई का सुझाव दिए। गुलजार प्रधान, सईद अहमद, अथर हुसैन, हाजी अनीस अहमद, गुलाम शैदा, सबीउल हसन, मोहम्मद आसिफ, इंतजार अहमद, उस्मान अहमद, महफूजुर्रहमान, हम्माद, अहसान, इसरार, अमीर अली आदि मौजूद रहे।
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