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उमा भारती की हुंकार के बाद भी नहीं जागे अफसर

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उमा के आदेश के बाद भी नहीं जागे अफसर
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अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
नमामि गंगे योजना के तहत महात्मा विदुर की कुटी को सजाने-संवारने के साथ बैराज व बालावाली गंगा घाट बनाने के साथ जीर्णोद्धार की कवायद शुरू हो गई है। इसके बाद भी विदुर कुटी पर अब तक काम भी शुरू नहीं हुआ है। केंद्रीय मंत्री उमा भारती की हुंकार के बाद भी अफसर नहीं जागे हैं।
नमामि गंगे योजना के लिए करीब पांच करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने दिए हैं। काम करने का जिम्मा आरकेएस कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया है। योजना के तहत चेजिंग रूम, ऑफिस, पेयजल की व्यवस्था, स्वागत द्वार बनाने का काम होना है। इसके अलावा गांवों का गंगा में आने वाला प्रदूषित पानी भी रोका जाना है। विदुर कुटी पर दो गंगा घाट बनेंगे। तीन करोड़ 80 लाख की लागत से श्मशान घाट भी बनाया जाना है। 20 जनवरी 2017 से कंपनी को काम शुरू करना था, पर छह माह बाद भी धरातल पर कुछ नहीं हुआ।
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पांच जून को गंगा बैराज आई उमा भारती ने खुले मंच से महात्मा विदुर की कुटी पर घाट व अन्य काम होने के बारे में अफसरों से जानकारी मांगी तो सभी के हाथ-पांव फूल गए। निर्माण कंपनी के अफसर भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। उमा भारती ने रात में ही विदुर कुटी जाकर वहां के काम देखने की जिद पकड़ ली। इससे हकबकाए अफसरों ने काफी मान-मनौव्वल के बाद उमा भारती को विदुर कुटी न जाने के लिए मनाया। उमा भारती ने इसके बाद एलान कर दिया कि उनकी अगली गंगा यात्रा बैराज से शुरू होगी। इसे वे दो-तीन दिन में शुरू करेंगी। इसके बाद भी निर्माण कंपनी के अफसरों के साथ जिले के आला अफसर नहीं जागे हैं।
अफसरों को इसबएात का भी डर नहीं है कि कभी भी उमा भारती विदुर कुटी आकर निर्माण कार्योें को देख सकती हैं। नमामि गंगे योजना के तहत गंगा बैराज पर एक करोड़ 70 लाख की लागत से लाल पत्थर से गंगा घाट बनाने, प्रकाश व्यवस्था आदि काम होने हैं। बैराज घाट पर पत्थर लगा दिए गए हैं। अन्य निर्माण भी चल रहा है। बालावाली में गंगा पर चार करोड़ की लागत से घाट बनाने के साथ प्रार्थना हॉल, लकड़ियों के लिए स्टोर रूम, भगवान शिव की मूर्ति, राख रखने के लिए कमरा बनाए जाने हैं। यहां भी अभी काम शुरू नहीं हुआ है।

गंगा नहीं तो क्यों बन रहे घाट
महात्मा विदुर की कुटी से गंगा की धारा दो किलोमीटर दूर चली गई है। बरसात के दिनों में जरूर पानी विदुर कुटी के निकट कुछ दिन के लिए आ जाता है। विदुर कुटी पर गंगा को फिर से लाने की मांग काफी दिन से चल रही है। पहले गंगा विदुर कुटी पर ही बहती थी। अब अफसरों को बताया जा रहा है कि जब गंगा ही नहीं है तो घाट बनाने का क्या औचित्य है। केंद्र का मामला होने के कारण सब चुप्पी साधे हैं।
हस्तिनापुर अभयरण्य में होने के कारण अभी वन विभाग ने यहां निर्माण की भी अनुमति नहीं दी है। अच्छा रहे कि इस दौरान घाट तक गंगा लाने की कोई योजना बन जाए। पर्यटन विभाग की और से 15 साल पूर्व यहां लाखों रुपये से सौंदर्यकरण कराया गया था। गंगा के घाट पर न होने के कारण यहां पर्यटक कम आते हैं। इसलिए इसका कोई लाभ नहीं हो सका।
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पहला इस्तेमाल हुआ नहीं, बना रहे नया शौचालय
मायावती सरकार के दौरान विदुर कुटी पर छह लाख रुपये की लागत से सार्वजनिक शौचालय बनवाया गया था। इसका कोई इस्तेमाल नहीं हुआ। आलम यह है कि शौचालय के दरवाजे तक टूट गए हैं। शौचालय का पानी डालने के लिए नाला वहां डाला गया है जहां विदुर कुटी के नीचे कभी गंगा बहती थी। शौचालय के गंदे पानी का नाला गंगा में डालने का लोगों ने विरोध भी किया, पर यह बंद नहीं हुआ। अब नमामि गंगे योजना के तहत विदुर कुटी पर नया शौचालय भी बनवाया जा रहा है, जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं है।

विदुर कुटी पर शुरू नहीं किया गया घाट बनाने का काम
- विदुर कुटी, बैराज व बालावाली में गंगा पर घाट बनाने के साथ होना है जीर्णोद्धार
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