‘पाकिस्तान का नाम नक्शे से मिट जाने दो’
नजीबाबाद। अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था के कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से पुलवामा के शहीदों को नमन किया। अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था की ओर से कवि एवं समाजसेवी निशा अग्रवाल के निवास पर काव्य गोष्ठी आयोजित हुई। काव्य गोष्ठी में कवियों ने पुलवामा के शहीदों और भारतीय के जांबाजों को अपनी रचना के माध्यम से नमन किया। प्रदीप डेजी ने मेरे भारत की मिट्टी में रिश्तों की फुलवारी है, पहरेदार वतन के दिल में पहरेदारी है। निशा अग्रवाल ने नाज हमें उन वीरों पर जो प्राण लुटाकर आए है, शान तिरंगे की रखी बस वंदेमातरम गाये है। अजय जैन ने आतंकिस्तान में घुसकर किया जिसने करारा प्रहार, सरदार जितेंद्र कक्कड़ ने अभिनंदन के अभिनंदन है, चंदन में भी वो चंदन है। कुमुद कुमार ने कहा एक-एक पुलवामा के बदले सौ सौ बालाकोट हो जाने दो, पाकिस्तान का नाम दुनिया के नक्शे से मिट जाने दो। जितेंद्र जैन ने मेरा भारत दुनिया से अजब निराला है, अजय जौहरी ने भूलेंगे न माफ करेंगे, सारा कचरा साफ करेंगे। प्रेमलता वैश्य ने मैं गया उस जगह, भूमि जहां की थी रक्त रंजित, कह रही हर बूंद बदला लेना है अब तो सुनिश्चित। सतेंद्र गुप्ता ने इस धरती पर पैदा हुए सूर, कबीर और तुलसी है, रचनाओं के माध्यम से वीर जवानों को नमन किया। इस अवसर पर शिवकुमार, भगीरथ सिंह, नीरज सिंघल, राजेश मिश्रा राजू, राजेंद्र त्यागी आदि ने रचनाएं प्रस्तुत कीं।