नजीबाबाद। मशहूर संगीतकार दिलीप सेन कहते हैं कि शब्द, राग और ठहराव से गीत सदाबहार बनते हैं। मौजूदा संगीत ने नई पीढ़ी को अपनी ओर आकर्षित किया है। नजीबाबाद पहुंचे समीर सेन का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। दिलीप सेन कहते हैं कि कठिन साधना से ही कोई लक्ष्य हासिल होता है।
ये दिल लगी, इतिहास, आइना, महरबान जैसी फिल्मों का जिक्र आते ही संगीतकार दिलीप सेन-समीर सेन की जोड़ी के गीत जुबां पर आ जाते हैं। ओले-ओले दिल मेरा डोले.., इश्क बड़ा बेदर्दी है.., दिल की कलम से बोल गोरिया बोल जैसे गीत जुबां पर आते ही संगीतकार दिलीप सेन और समीर सेन की जोड़ी युवाओं को थिरकने के लिए मजबूर कर देती है। हलचल म्यूजिकल सोसायटी के निदेशक सुशील गुप्ता की उपस्थिति में मो.फैजी की मोबाइल एप इजी टू अर्न के उद्घाटन पर नजीबाबाद पहुंचे संगीतकार का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
संगीतकार दिलीप सेन ने अपने भतीजे समीर सेन के साथ 250 से अधिक फिल्मों में संगीत दिया। जगदीप की फिल्म सूरमा भोपाली से संगीत करियर की शुरुआत करने वाले दिलीप सेन ने 80 के दशक में कत्थक डांसर के रूप में पहचान बनाई।
गीतकार कैफी आजमी, जावेद अख्तर, समीर अंजान के गीतों को मधुर संगीत देने वाले दिलीप सेन का कहना है कि वर्तमान में साउंड और बीट पर आधारित गीतों का दौर है। गोविंदा के साथ अनाड़ी नंबर वन में काम करने वाले दिलीप सेन कहते हैं कि उनका स्वप्न एक्टर बनना था। लेकिन तीन पीढ़ियों से चले आ रहे संगीत के माहौल ने उन्हें बतौर संगीतकार फिल्म इंडस्ट्री में पहचान दिलाई।
दिलीप सेन और समीर सेन के संगीत निर्देशन में चर्चित फिल्मों में कोहराम, कर्तव्य, अर्जुन पंडित, जिद्दी, अनाड़ी नंबर वन, सलाखें, आग ऐसी फिल्मी हैं जिनके गीतों ने धूम मचाई। 1500 से अधिक गानों को संगीतबद्ध करने वाले दिलीप सेन संगीत के क्षेत्र में आने वाली पीढ़ियों को संगीत साधना से जुड़ने की सलाह देते हैं।