‘मन, वचन, कार्य की सरलता ही आर्जव धर्म’
नजीबाबाद। दशलक्षण पर्व के चौथे दिन पंडित अभिषेक जैन ने कहा कि दशलक्षण पर्व आत्मा को निर्मल बनाने का पर्व है। श्रद्धालुओं ने तीर्थकर की आरती उतारी।
सोमवार को श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में आयोजित शांतिधारा और सामूहिक पूजन कार्यक्रम में धर्म चर्चा करते हुए पंडित अभिषेक जैन ने कहा कि दशलक्षण पर्व के सभी दस अंगों का पालन अपनी आत्मा से करना चाहिए। उन्होंने सत्य वचन को व्यवहार में लाने, आत्मा को निर्मल बनाने की सलाह दी। शांतिधारा संजय जैन की ओर से की गई। श्रद्धालुओं ने तीर्थंकर भगवान की आरती की। पारसनाथ जैन, जिनेश्वरदास जैन, प्रेमचंद जैन, ज्ञानचंद जैन, संदीप जैन, अजय जैन, दीपक जैन, जितेंद्र जैन, समला जैन, सुनीता, संध्या जैन, सुषमा जैन, रुक्मिणी जैन, रश्मि जैन, अलका जैन, रैना जैन, मंजू जैन, कुमकुम जैन आदि ने श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर, श्री दिगंबर जैन सरजायती मंदिर में भगवान का अभिषेक और पूजा प्रक्षाल की। इससे पूर्व दशलक्षण पर्व के तीसरे दिन पंडित अभिषेक जैन ने कहा कि आर्जव धर्म मन को स्थिर, पाप को नष्ट करने वाला और सुखदायी है। उन्होंने आर्जव धर्म को आचरण में लाने, उसका पालन और श्रवण करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मन, वचन, कार्य की सरल प्रवृत्ति का नाम ही आर्जव है।