चांदपुर और बिजनौर चीनी मिल पर कसा शिकंजा
बिजनौर। चांदपुर और बिजनौर चीनी मिल से कर्मचारियों को हटाने के मामले में डीएम ने श्रम विभाग की जांच बैठा दी है। इसके अलावा बाकी विभागों से भी मिलों पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है। मिलों के न चलने पर प्रशासन अगली कानूनी प्रक्रिया अपनाने के लिए भी पूरी तरह तैयार है। अगर मिलें न चलीं तो दोनों मिलों से पिछले साल के बराबर गन्ना मूल्य लिया जाएगा।
किसान यूनियनों के आंदोलन और प्रशासन की सख्ती के बाद भी बिजनौर और चांदपुर चीनी मिल में अभी तक मरम्मत का काम नहीं शुरू किया गया है। वेव ग्रुप के अधिकारी दोनों चीनी मिलों की मरम्मत कराने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन ने मिलों की 25 जुलाई तक मरम्मत शुरू न होने पर 26 जुलाई से वेव ग्रुप का सभी कारोबार ठप करने की चेतावनी दी है। किसानों के आंदोलन, जाम आदि लगाने से लॉ एंड ऑर्डर की समस्या खड़ी हो जाती है। प्रशासन किसी भी हालत में 25 जुलाई तक मिलों में मरम्मत शुरू कराना चाहता है। मिल प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए पूरी तैयारी की जा रही है। मिल प्रशासन ने कुछ दिन पहले कर्मचारियों को काम से निकाल दिया था। इस मामले की जांच डीएम ने श्रम विभाग को सौंपी है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक कंपनी कर्मचारियों को बिना नोटिस दिए ऐसे ही नहीं हटाया जा सकता है। इसके अलावा बाकी विभागों को भी चीनी मिलों में कमी ढूंढकर घेरने को कहा गया है। पिछले साल बिजनौर चीनी मिल ने 128 तथा चांदपुर चीनी मिल ने 206 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा था। अगर दोनों मिल इस बार नहीं चलती तो इतना गन्ना मूल्य वेव ग्रुप से वसूलना तय माना जा रहा है। प्रदेश सरकार भी नहीं चाहेगी कि चुनावी साल में ऐसे कोई मिल बंद हो जाए। अगर ऐसा होता है तो दोनों मिलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दोनों चीनी मिलों पर मरम्मत शुरू कराने के लिए पूरा दबाव बनाया जा रहा है। ऐसा नहीं हुआ तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - यशपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी।
25 जुलाई के बाद मिलों की मरम्मत शुरू कराने के लिए और समय नहीं दिया जाएगा। भाकियू आरपार की लड़ाई लड़ेगी। पहले चड्ढ़ा ग्रुप के बिजनौर और बाद में पूरे वेस्ट यूपी के कारोबार पर कब्जा कर लिया जाएगा। - दिगंबर सिंह, भाकियू जिलाध्यक्ष।