तटबंध की मांग अधूरी, किसानों में रोष
भागूवाला। किसानों को वर्षा शुरू होते ही कोटावाली नदी के उफान से उनके खेतों में होने वाले कटान का भय सताने लगा है। एक दशक से किसान प्रशासन से खेतों को कटान बचाने के लिए तटबंध बनवाने की मांग कर रहे हैं।
भागूवाला क्षेत्र से कोटावाली नदी गुजरती है। बारिश में कोटावाली नदी रौद्र रूप धारण कर लेती है। नदी के समीप बसे कोटावाली गांव के किसानों की जमीनें नदी के समानांतर हैं। एक दशक से अधिक समय में कोटावाली नदी में कई बीघा कट चुकी है। नदी का जलस्तर कटान करते हुए हरिद्वार दिशा में बसा गांव कोटावाली उजड़ चुुका है। जिसके चलते 20 परिवार नदी के दूसरे छोर भागूवाला दिशा में ग्राम समाज की भूमि पर अस्थायी निवास बनाकर रह रहे हैं। जिससे किसानों को नदी के दूसरे छोर स्थित अपने खेतों में जाकर कृषि कार्य करने में भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं कोटावाली के प्राथमिक विद्यालय से नदी केवल 25 फीट दूर पर है। स्कूल में 50 बच्चे अध्ययनरत हैं। विद्यार्थियों को भी नदी काजलस्तर बढ़ने पर स्कूल के तबाह होने का डर सता रहा है।
नाथेराम, दयाराम, ऋषिपाल, मुन्ना, राजेंद्र आदि किसानों का कहना है कि उन्हें प्रत्येक वर्ष खेतों के कटान का दंश झेलना पड़ रहा है। खेतों को बचाने की मुहिम के लिए वे एक दशक से नदी छोर पर तटबंध बनवाने की प्रशासन से मांग कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन ने उनकी समस्या का कोई हल नहीं निकाला है। उधर किसानों पर ग्राम समाज की भूमि खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है। किसानों ने तटबंध बनते ही ग्राम समाज की भूमि खाली करने की बात कही है।