वकील के हत्यारे की नहीं होगी समय पूर्व रिहाई
बिजनौर।
उत्तर प्रदेश शासन ने वकील रामचरन सिंह की हत्या में सजा भुगत रहे नरेंद्र की समय पूर्व रिहाई करने से मना कर दिया है। इस आशय का शासकीय पत्र जेल महानिरीक्षक को भेज दिया गया है। नरेंद्र वर्तमान मे आगरा की केंद्रीय कारागार में बंद है।
बिजनौर के गांव स्वाहेड़ी निवासी रामचरन सिंह बिजनौर में वकालत करते थे। दिनांक 15 जून 1992 को वह अपने पुत्र के साथ गांव में कार से खेत पर गए थे। उनका पुत्र ट्यूबवेल पर चला गया। इस दौरान गांव के ही नरेंद्र ने पुरानी रंजिश के चलते अपने तीन साथियों के साथ तमंचे से गोली मारकर रामचरन सिंह की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड में मुजफ्फरनगर में षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा 20 मार्च 2001 को नरेंद्र को आजीवन कारावास से दंडित किया गया था। हाईकोर्ट ने नरेंद्र की अपील को निरस्त करते हुए सजा को बरकरार रखा था। इस मामले में नरेंद्र सिंह ने 18 अगस्त 2017 तक 20 वर्ष पांच माह 27 दिन की सजा काट ली थी।
इस आधार पर उसने समय पूर्व रिहाई की याचना की थी। इसका मामला जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में गठित समिति को सौंपा गया। समिति ने उसकी समय पूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की। प्रोबेशन बोर्ड ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बंदी ने पुरानी रंजिश में अपने साथियों के साथ मिलकर रामचरन सिंह की हत्या करने का जघन्य अपराध किया है। इस तरह के अपराधियों की समय पूर्व रिहाई से समाज में न्यायिक प्रणाली के बारे में विपरीत संदेश जाएगा। शासन ने बंदी द्वारा की गई अपराध की जघन्यता, एसपी, डीएम, प्रोबेशन अधिकारी द्वारा की आख्या में समय पूर्व रिहाई का विरोध किए जाने के कारण बंदी नरेंद्र को समय पूर्व रिहाई का पात्र न पाते हुए समय पूर्व रिहाई की मांग को खारिज कर दिया है।