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गन्ने को लेकर प्राइस वार छिडने के आसार, किसानों की लगेगी लॉटरी

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नगद राशि व तेल का किराया देकर गन्ना खरीदने की हो रही तैयारी
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बिजनौर। जिले में गन्ने को खरीदने के लिए प्राइस वार होने के आसार बन गए हैं। बाहर की शुगर मिलें जिले के किसानों को नगद राशि व किराया देकर प्रलोभित कर रही हैं। इससे किसानों का रुख भी इन मिलों की ओर बढ़ रहा है। दूसरे जिलों में भी जिले के गन्ने की मांग बढ़ रही है।
रिकवरी में बिजनौर का गन्ना देश में सबसे मीठा निकला है। रिकवरी 11 प्रतिशत तक है। जिले में गन्ने का रकबा भी सवा दो लाख हेक्टेयर है। 93 प्रतिशत रकबा अर्ली प्रजाति के गन्ने का है। रिकवरी व उत्पादन बढ़ने के बाद भी चीनी के दाम 3650 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे हैं। इतने रेट पर मिलों को काफी लाभ हो रहा है। वेस्ट यूपी में गन्ना उत्पादन व रिकवरी में जिले का कोई सानी नहीं है। इस वजह से आसपास के जिलों के अलावा उत्तराखंड की चीनी मिलों का प्रबंधन तंत्र जिले के किसानों का गन्ना खरीदने पर जोर लगा रहा है। नियम के अनुसार कोई भी मिल दूसरी मिल क्षेत्र के किसानों का गन्ना नहीं खरीद सकती है, लेकिन चुपचाप सभी काम हो जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक उत्तराखंड के चीनी मिल मालिक तो खादर क्षेत्र का गन्ना खरीदने तक लगे हैं। उत्तर प्रदेश में गन्ने के दाम 325 रुपये प्रति क्विंटल हैं। उत्तराखंड चीनी मिल इतने ही मूल्य का नगद भुगतान देने को तैयार हैं और साथ में आने जाने के लिए किराया और दे रहे हैं।
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2010-11 के सीजन में गन्ने को लेकर प्राइसवार छिड़ी थी। तब गन्ने के दाम 190 रुपये प्रति क्विंटल थे, लेकिन मिलों ने मूल्य बढ़ाकर 280 रुपये प्रति क्विंटल तक में गन्ना खरीदा था। तब किसानों को प्राइसवार होने से बहुत फायदा हुआ था।
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भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार मिल मालिकों को बहुत फायदा हो रहा है। सरकार को कम से कम 350 रुपये प्रति क्विंटल करना चाहिए था। जो भी चीनी मिल महंगा गन्ना खरीदेगा, किसान वहां गन्ना बेचेगा। ऐसे किसानों की भाकियू पूरी मदद करेगी।
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