नसबंदी के बाद भी मां बनी 60 महिलाएं
बिजनौर। चिकित्सकों की लापरवाही से इस बार भी दस नसबंदी केस फेल हुए हैं। इनमें से चार को आर्थिक मदद दी जा चुकी है, जबकि आधे से अधिक मुआवजे पाने को काट चक्कर काट रहे हैं। पिछले साल भी आठ महिलाओं को नसबंदी के बाद भी मां बनी थी। कुल मिलाकर पिछले पांच वर्षों में नसबंदी कराने के बावजूद अब तक कुल 60 महिलाओं को बच्चे पैदा हो चुके हैं।
जिले में नसबंदी करने वाले चिकित्सकों की लापरवाही कम नहीं हो रही है। इसका उदाहरण है कि पिछले पांच वर्षों में अब तक कुल 60 महिलाएं नसबंदी कराने के बावजूद गर्भवती हो गई हैं। सरकार जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम चला रखा है। इसके बावजूद महिलाएं मां बन रही हैं। अफसरों के अनुसार नसबंदी कराने के बाद गर्भवती होने पर परिवार नियोजन क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत भुगतान की जाने वाली क्षतिपूर्ति के अनुसार नसबंदी के दौरान या उसके बाद सात दिन के अंदर मृत्यु हो जाने पर दो लाख, नसबंदी होने के आठ से 30 दिन के अंदर मृत्यु होने पर 50 हजार, नसबंदी कराने के बाद 60 दिन के अंदर कोई अन्य दिक्कत आने पर 25 हजार रुपये तक का अस्पताल खर्च एवं नसबंदी असफल हो जाने पर लाभार्थी को 30 रुपये देने का प्रावधान है। यह योजना एक अप्रैल 2013 को लागू की गई थी। इस साल भी दस केस फेल हुए हैं। इनमें से अभी तक केवल चार पात्रों को क्षतिपूर्ति का लाभ दिया गया है, जबकि आधे से अधिक क्षतिपूर्ति पाने के लिए भटकने को मजबूर हैं। सीएमओ शरद कुमार त्यागी का कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह बेहद ही गलत है। चिकित्सकों को इसका ध्यान रखना चाहिए। ऑपरेशन के समय पूरी सावधानी बरतें। मामले की जांच कराकर पीड़ितों को शासन की योजना का लाभ दिलाया जाएगा।
वर्ष महिलाएं
2014-15 06
15-16 23
16-17 13
17-18 08
18-19 10
कुल 60
नसबंदी कराने पर सरकार देती है इतनी धनराशि
स्वास्थ्य विभाग में परिवार नियोजन योजना के नोडल अधिकारी रोहताश कुमार बताते हैं कि महिला को नसबंदी कराने पर सरकार की ओर से प्रोत्साहन के रूप में दो हजार एवं ऑपरेशन से प्रसव के तुरंत बाद नसबंदी कराने पर तीन हजार रुपए दिए जाते हैं। बताया कि बिजनौर जनपद मिशन परिवार विकास में आता है इसलिए यहां पर महिला नसबंदी कराने पर दो हजार दिए जाते हैं, जबकि अन्य जिलों में यह राशि मात्र 1400 रुपये है।