बंद पड़ा आईसीयू वार्ड और बेबी वार्मर मशीन
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
जिला संयुक्त चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी से आईसीयू वार्ड और महिला अस्पताल की बेबी वार्मर मशीन शोपीस बन गई है। इसके कारण मरीजों को मामूली बीमारी में भी हायर सेंटर रेफर किया जाता है। बेबी वार्मर मशीन नहीं चलने से बच्चों को उपचार के लिए निजी अस्पताल भेजा जाता है।
दरअसल, जिले में चिकित्सकों की भारी कमी है, यहां 169 पदों के सापेक्ष मात्र 51 चिकित्सक तैनात हैं। जिला संयुक्त चिकित्सालय में करीब दस साल पहले करोड़ों की लागत से आईसीयू वार्ड बनाया गया था। आईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन सेंट्रल सिस्टम और मॉनिटर लगा हुआ था। मॉनिटर से मरीज के शरीर की ऑक्सीजन, ब्लडप्रेशर और हार्टवीट आदि का ध्यान रखा जाता था। कार्डियोलाजिस्ट डॉ. वीके सिंह का आईसीयू वार्ड के मरीजों को खूब लाभ मिला। लेकिन उनका स्थानांतरण हो गया। दस साल बाद भी जिला अस्पताल में किसी कार्डियोलाजिस्ट की तैनाती नहीं की गई।
बरसात के मौसम में आईसीयू वार्ड को डेंगू, डिप्थीरिया वार्ड बना दिया जाता है। जिले के जनप्रतिनिधियों का भी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रति कोई खास ध्यान नहीं है। लोगों का मानना है कि जन प्रतिनिधि प्रयास करें तो चिकित्सकों की संख्या बढ़ सकती है। वर्ष 2017 में सर्जन वीके शुक्ला, हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक को भी सीएमओ बना दिया गया। उनके स्थान पर भी कोई चिकित्सक को तैनात नहीं किया गया।
जिला महिला अस्पताल में तैनात रहे बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बाबू सिंह भी करीब दो साल पहले सेवानिवृत्त हो गए थे। सेवानिवृत्त होने के बाद वह संविदा पर कार्य कर रहे थे। इसके बाद अक्तूबर 2017 में वह काम छोड़कर चले गए। उनके जाने से जिला महिला अस्पताल में रखी चार बेबी वार्मर मशीन नहीं चलती हैं। यहां तक कि अस्पताल स्टाफ द्वारा नवजात बच्चों को प्राइवेट अस्पताल में ले जाने की सलाह दी जाती है। बेबी वार्मर मशीन में बच्चों को ठंड लगने, पीलिया होने व अन्य परेशानी होने पर मशीन में रखा जाता है।
प्रत्येक महीने भेजी जाती है रिपोर्ट
जिला संयुक्त चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. राकेश दुबे और महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. आभा वर्मा ने बताया कि चिकित्सकों की कमी की रिपोर्ट प्रत्येक माह शासन को भेजी जाती है। अस्पताल में चिकित्सक की तैनाती शासन के हाथ में है, उनके द्वारा सिर्फ शासन को रिमाइंडर की भेजा जाता है।